Saurav Singh
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति ( एट्रोसिटी एक्ट) अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने और उसकी व्याख्या को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था. अली अंसारी उर्फ मो.अली हुसैन एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य के तहत पारित न्यायादेश के तहत कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर किसी घटना में शामिल लोगों के समूह में कुछ सदस्य स्वयं एससी SC- एसटी ST समुदाय से आते हैं, तो वैसी स्थिति में एट्रोसिटी एक्ट के तहत अपराध का मामला नहीं बनता है. इस ऐतिहासिक न्यायिक आदेश की अनुपालन की स्थिति की समीक्षा को लेकर झारखंड डीजीपी DGP की अध्यक्षता में आगामी 21 जुलाई को एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई है.
क्या था पूरा मामला और कोर्ट का आदेश
यह मामला अली अंसारी उर्फ मो.अली हुसैन एवं अन्य बनाम झारखंड राज्य एवं अन्य’ (क्रिमिनल अपील एस.जे. संख्या-67/2021) से जुड़ा है. अपीलकर्ताओं ने बोकारो के सेक्टर-12 थाना (केस नंबर 66/2020) में दर्ज प्राथमिकी के बाद अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी. निचली अदालत (एडिशनल सेशंस जज-I-कम-स्पेशल जज, बोकारो) ने 18 दिसंबर 2020 को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. जिसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. आरोपियों पर आईपीसी IPC की विभिन्न धाराओं (147, 148, 149, 323, 341, 342, 307, 353, 379, 504, 506, 188, 269, 270) के साथ-साथ एससी SC-एसटी ST संशोधन अधिनियम की धारा 3(1)(u) के तहत मामला दर्ज था.
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और फैसला
अदालत ने पाया कि जिस ग्रुप या भीड़ के खिलाफ आरोप लगाया गया था, उसमें खुद कुछ सदस्य एससीSC -एसटी ST समुदाय से ही ताल्लुक रखते थे. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि अगर कोई ऐसा ग्रुप बनता है, जिसमें कुछ लोग एससी SC-एसटी ST कम्युनिटी के हो, तो वहां एससीSC-एसटी ST एक्ट के तहत अपराध का गठन नहीं होता. बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी थी कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप बेहद सामान्य प्रकृति के है. हमले का दावा तो किया गया, लेकिन रिकॉर्ड पर कोई इंजरी रिपोर्ट पेश नहीं की गई. सरकारी वकील और पीड़ित पक्ष के विरोध के बावजूद, हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों को देखते हुए अपील मंजूर कर ली. कोर्ट ने आरोपियों को निर्देश दिया कि वे चार हफ्ते के भीतर निचली अदालत में सरेंडर करें. जहां उन्हें 10,000 रुपये के बेल बॉन्ड और दो श्योरिटी जमा करने पर जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा.
DGP की समीक्षा बैठक : इन 6 बड़े एजेंडों पर मांगी गई रिपोर्ट
– झारखंड के पुलिस महानिदेशक DGP ने इस अदालती आदेश के अनुपालन और राज्य में एससी SC-एसटी ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के लिए जिले के एसएसपी SSP, एसपी SP को निर्देश जारी किया है. सभी कप्तानों को निर्देश दिया गया है कि वे मुख्य एजेंडा बिंदुओं पर डेटा तैयार कर बैठक में शामिल हो.
– एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामले क्यों लंबित है, सुपरविजन या रिपोर्ट-2 के लिए कितने केस रुके है, अनुसंधान पूरा होने के बावजूद अंतिम आदेश के लिए लंबित मामलों की संख्या कितनी है.
– गिरफ्तारी, वारंट, इश्तेहार और कुर्की-जब्ती के लिए लंबित पड़े मामलों का पूरा ब्योरा.
– एट्रोसिटी एक्ट के तहत पीड़ित पक्षों को मुआवजा, सहायता और पुनर्वास देने के संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और उसकी अपडेटेड स्थिति क्या है?
– फास्ट ट्रैक कोर्ट, स्पीडी ट्रायल और दोषियों को सजा दिलाने से जुड़े पिछले पांच साल के आंकड़े.
– अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज कराए गए ऐसे मामलों की सूची जो जांच में झूठे पाए गए है.
– अधिनियम की धारा-15(A)(3) के तहत पीड़ितों और गवाहों के अधिकारों व सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के अनुपालन की समीक्षा.
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