खास महल सर्वे के बीच उठा बड़ा सवाल, हजारीबाग के 17 ऐतिहासिक कुएं आखिर कहां गायब हो गए?

Hazaribagh: शहर में इन दिनों खास महल जमीनों का सर्वेक्षण चल रहा है. प्रशासन की इस पहल का लोग स्वागत कर रहे...

Hazaribagh: शहर में इन दिनों खास महल जमीनों का सर्वेक्षण चल रहा है. प्रशासन की इस पहल का लोग स्वागत कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच शहर के ऐतिहासिक जलस्रोतों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अंग्रेजी शासन काल में आम लोगों की सुविधा के लिए बनाए गए 17 सार्वजनिक कुएं आखिर कहां गायब हो गए. आरोप है कि समय के साथ इन जलस्रोतों को अतिक्रमण और निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ा दिया गया.

आजादी के समय शहर में थे 17 बड़े सार्वजनिक कुएं

जानकारों के अनुसार आजादी के समय हजारीबाग शहर में करीब 17 बड़े सार्वजनिक कुएं मौजूद थे. ये कुएं अंग्रेजी शासन काल में जलापूर्ति और राहगीरों की सुविधा के लिए बनाए गए थे. मेन रोड, गुरु गोविंद सिंह रोड सहित शहर के कई प्रमुख इलाकों में इनका अस्तित्व था.

कुओं की जगह बन गए बाजार और मकान

स्थानीय लोगों का दावा है कि समय के साथ अधिकांश कुएं मिट्टी से भर दिए गए या उन पर निर्माण कर दिया गया. मेन रोड के तीन कुओं की जगह आज बाजार खड़े हैं, जबकि गुरु गोविंद सिंह रोड का ऐतिहासिक कुआं पूरी तरह समाप्त हो चुका है. कई स्थानों पर पक्के मकान बन चुके हैं और इन जलस्रोतों का कोई निशान नहीं बचा है.

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तालाबों का भी लगातार सिमटता गया दायरा

शहर के कई तालाब भी अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं. धोबिया तालाब और ओकनी तालाब जैसे प्रमुख जलस्रोतों पर वर्षों से कब्जे के आरोप लगते रहे हैं. प्रशासन द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी. स्थानीय लोगों का मानना है कि कुओं और तालाबों के समाप्त होने का असर अब भूजल स्तर और जल संकट के रूप में दिखाई देने लगा है. पहले जिन क्षेत्रों में जलस्रोत मौजूद थे, वहां वर्षा जल का प्राकृतिक संचयन होता था, जो अब लगभग समाप्त हो गया है.

अमृत सरोवर योजना को लेकर भी उठे सवाल और जांच की मांग

देश में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए अमृत सरोवर जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं. ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब पुराने तालाब और कुएं ही नहीं बचाए जा सके, तो नई योजनाओं का उद्देश्य किस हद तक सफल हो पाएगा. सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के वरिष्ठ नागरिकों ने मांग की है कि खास महल जमीनों के सर्वेक्षण के साथ-साथ शहर के पुराने कुओं, तालाबों और नालों की भी जांच कराई जाए. साथ ही यह पता लगाया जाए कि किन परिस्थितियों में इन सार्वजनिक जलस्रोतों का अस्तित्व समाप्त हुआ और क्या इनके रिकॉर्ड आज भी सरकारी दस्तावेजों में सुरक्षित हैं.

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