Ranchi : राज्य सरकार ने अलग-अलग मामलों में विभागीय कार्यवाही का सामना कर रहे झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अफसरों को सरकार ने दोषमुक्त कर दिया है. इन अफसरों में गुलाम समदानी, अरविन्द कुमार और अनिल कुमार सिंह शामिल है. खाद्य आपूर्ति से लेकर कृषि विभाग तक फैले इन मामलों में दिलचस्प बात यह है कि दोबारा जांच और साक्ष्यों के परीक्षण-प्रतिपरीक्षण के बाद भी जांच अधिकारियों को इनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले.
गुलाम समदानी : लॉगिन का खेल, ऑपरेटर पर फोड़ा ठीकरा
आरोप : गुमला के तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी गुलाम समदानी पर 1938 राशन कार्डों को अवैध तरीके से आदिम जनजाति श्रेणी में बदलने का आरोप था. आरोप था कि इससे अपात्रों को लाभ मिला और असली हकदार वंचित रहे.

फैसला : जांच में पाया गया कि कार्ड परिवर्तन डीएसओ के आईडी से जरूर हुए, लेकिन उस समय सिस्टम में ओपीटी या अलर्ट की व्यवस्था नहीं थी. कंप्यूटर ऑपरेटरों ने नियमित प्रक्रिया में यह कार्य किया. समदानी द्वारा मामले की जानकारी मिलते ही एफआइआर दर्ज कराने और ऑपरेटरों को हटाने के कदम को उनके पक्ष में माना गया.
अरविन्द कुमारः 24 करोड़ की राजस्व क्षति और वसूली का आरोप
आरोप : हजारीबाग के तत्कालीन डीएसओ अरविन्द कुमार पर गंभीर आरोप थे.डीलरों से अवैध वसूली, धान भुगतान में मनमानी, और राइस मिलों की गलत टैगिंग के कारण 24.33 करोड़ की राजस्व क्षति.
फैसला : विभागीय जांच में वसूली के साक्ष्य नहीं मिले. धान भुगतान को निधि की उपलब्धता के आधार पर सही पाया गया. राजस्व क्षति के मामले में पाया गया कि मिलों का चयन उपायुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करती है, न कि अकेले डीएसओ. इन्हें भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने के आधार पर बेदाग घोषित किया गया.
अनिल कुमार सिंह : निलंबन खत्म, ड्यूटी से गायब रहने का आरोप खारिज
आरोप : कृषि विभाग के तत्कालीन अवर सचिव अनिल कुमार सिंह पर अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से गायब रहने और अनुशासनहीनता का आरोप था. जिसके कारण उन्हें निलंबित किया गया था.
फैसला : दो बार की गई विभागीय जांच के बाद संचालन पदाधिकारी ने उनके खिलाफ आरोपों को प्रमाणित नहीं पाया. सरकार ने जांच रिपोर्ट से सहमत होते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबन मुक्त कर दिया है.
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