आंगनबाड़ी सेविकाओं का सरकार पर आरोप, केंद्र के निर्देशों की अनदेखी कर बढ़ाया जा रहा काम का बोझ

रांची: झारखंड की आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उन्हें बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) एवं...

रांची: झारखंड की आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उन्हें बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) एवं राष्ट्रीय जनगणना कार्य से जल्द मुक्त नहीं किया गया तो वे सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगी. सेविकाओं का आरोप है कि पहले से विभागीय कार्यों के भारी दबाव के बीच अब अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर उनका मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है. रांची सहित राज्य के विभिन्न जिलों में सेविकाओं का जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण शुरू किया गया, जिसके बाद विरोध तेज हो गया है. झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए सरकार से तत्काल आदेश वापस लेने की मांग की है.

कम मानदेय, ऊपर से बढ़ता दबाव

यूनियन के संरक्षक बालमुकुंद सहाय ने कहा कि सेविकाओं को बेहद कम मानदेय मिलता है और कई मदों का भुगतान भी नियमित नहीं होता. इसके बावजूद उनसे लगातार अतिरिक्त कार्य लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषण, टीकाकरण, राशन वितरण और महिला-बाल योजनाओं के क्रियान्वयन के बीच पहले से बीएलओ का कार्य कराया जा रहा है. अब जनगणना कार्य जोड़ दिया गया है, जो मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है.

केंद्र सरकार के आदेश की भी अनदेखी

यूनियन नेताओं का दावा है कि केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग ने 12 मार्च 2025 को झारखंड सरकार को पत्र भेजकर आंगनबाड़ी सेविकाओं को विभागीय कार्यों के अलावा अन्य जिम्मेदारियों से मुक्त करने को कहा था. इसके बाद तत्कालीन समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने 7 अप्रैल 2025 को सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर चुनावी कार्य, सर्वेक्षण एवं अन्य विभागीय जिम्मेदारियों से सेविकाओं को मुक्त करने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद अब तक इसका पालन नहीं हुआ.

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पहले से ये जिम्मेदारियां निभा रही हैं सेविकाएं

तीन से छह वर्ष तक के बच्चों की पढ़ाई और पोषण देखभाल, हर माह टीकाकरण कार्यक्रम का संचालन, गर्भवती महिलाओं और बच्चों की निगरानी, तय मेन्यू के अनुसार पूरक पोषाहार वितरण, गर्भवती व धात्री महिलाओं को टीएचआर (सूखा राशन) देना, महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य योजनाओं में सहयोग, बीएलओ कार्य का निर्वहन

मानदेय भी बेहद कम

सेविका

मद राशि

केंद्र सरकार ₹4,500

राज्य सरकार ₹6,500

कुल ₹11,000

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सहायिका

मद राशि

केंद्र सरकार ₹2,250

राज्य सरकार ₹3,250

कुल ₹5,550

राज्य में 38 हजार से अधिक केंद्र

राज्यभर में कुल 38,432 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. यानी इतने ही सेविका और सहायिकाएं कार्यरत हैं. वहीं रांची शहरी क्षेत्र में लगभग 350 केंद्र हैं.

सुविधाओं से अब भी वंचित

यूनियन का कहना है कि केंद्र सरकार की घोषणाओं के बावजूद सेविकाओं को अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा, सेवानिवृत्ति पर पांच लाख रुपये की सहायता, पेंशन तथा ग्रेच्युटी जैसी सुविधाएं नहीं मिली हैं यूनियन ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो राज्यव्यापी आंदोलन के साथ सामूहिक इस्तीफा दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी.

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