SAURAV SINGH
Ranchi : झारखंड सरकार के वित्त विभाग ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र में एक बड़ा बदलाव करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है. सरकार ने निम्नतर वेतनमान के अधिकारियों को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत उच्चतर पदों का प्रभार दिए जाने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है. इस संबंध में वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार द्वारा राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

क्यों लिया गया यह फैसला?
वित्त विभाग के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए थे जहां जूनियर या कम वेतनमान वाले अधिकारियों को उच्च पदों का स्वतंत्र प्रभार सौंप दिया जाता था. इसके बाद, संबंधित अधिकारी उच्च पद पर काम करने की अवधि के वेतन अंतर के भुगतान की मांग को लेकर हाइकोर्ट में केस दायर कर देते थे.
इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट
द्वारा कुछ मामलों में अधिकारियों के पक्ष में निर्णय भी सुनाया गया है. उदाहरण के तौर पर पत्र में एसएलपी (Civil) Diary No. 33637/2022* और *SLP (Civil) No. 4104/2022* का हवाला दिया गया है. इन कानूनी पेचीदगियों और वित्तीय भार से बचने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.
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सेवा संहिता में नहीं है कोई प्रावधान
सरकार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि झारखंड सेवा संहिता में निम्न वेतनमान के अधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत उच्च पद का प्रभार देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है इसलिए, मुख्यमंत्री से प्राप्त निर्देशों और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस व्यवस्था को अविलंब समाप्त करने का अनुरोध किया गया है.
अपरिहार्य स्थिति के लिए क्या हैं नए नियम?
यदि कार्यहित में किसी उच्च पद का प्रभार दिया जाना अत्यंत आवश्यक हो, तो सरकार ने उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था तय की है. जिनमें यह व्यवस्था केवल बहुत ही कम समय के लिए होगी. अधिकारी अपने मूल पद पर बने रहेंगे और उन्हें उच्च पद का केवल अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा, स्वतंत्र प्रभार नहीं. इसके अलावा
इसके लिए झारखंड सेवा संहिता के नियम-103 (वित्त विभाग का पत्र संख्या 1082 दिनांक 22.02.1988 एवं ज्ञाप संख्या 3814 दिनांक 21.07.1992 सहपठित) के तहत सक्षम प्राधिकार से विधिवत अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा. साथ ही इस अल्प अवधि के दौरान ही विभाग को उस उच्च पद पर नियमित प्रभार की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करनी होगी. वित्त विभाग ने सभी विभागों को इस आदेश का कड़ाई से पालन करने और तदनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
