सूरज के तेवर और ग्रहों का फेरबदल: नौतपा में दिखेगा गर्मी और बवंडर का डबल रोल

Ranchi: जेठ का महीना लगते ही आसमान से आग बरसने का नया दौर शुरू हो गया है. इस बार मौसम के तेवर...

Ranchi: जेठ का महीना लगते ही आसमान से आग बरसने का नया दौर शुरू हो गया है. इस बार मौसम के तेवर और ग्रहों की चाल मिलकर एक अनोखा ताना-बाना बुन रहे हैं. 25 मई की रात 08:07 बजे जैसे ही सूर्य ने रोहिणी नक्षत्र में कदम रखा, उत्तर भारत समेत झारखंड में नौतपा के उस दौर का आगाज हो गया, जिसे साल का सबसे गर्म समय माना जाता है. शीतलता के प्रतीक माने जाने वाले चंद्रमा जब रोहिणी नक्षत्र के स्वामी होकर भी सूर्य की प्रचंड किरणों के सामने बेबस हो जाते हैं, तो धरती नौ दिनों के लिए भट्टी की तरह तपने लगती है. यह सिलसिला आगामी 2 जून तक अनवरत जारी रहेगा.

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आसमान से बरसेगी आग, पर मानसून के लिए है वरदान

पारंपरिक और ग्रामीण सोच की मानें तो नौतपा का यह झुलसना भविष्य के लिए एक वरदान है. मान्यता है कि इन नौ दिनों में जितनी भीषण गर्मी पड़ेगी, मानसून का रुख उतना ही दमदार होगा और खेतों में उतनी ही अच्छी फसल लहलहाएगी. हालांकि, ज्योतिषीय गणना इस बार एक अलग ही ट्विस्ट की ओर इशारा कर रही है. इस बार सिर्फ सूखी गर्मी नहीं, बल्कि ग्रहों के विशेष फेरबदल के कारण दोपहर के बाद अचानक धूल भरी आंधी, बवंडर और हल्की बूंदाबांदी का रोमांचक मिजाज भी देखने को मिल सकता है.

अध्यात्म और दान का महापर्व

यह तपता हुआ समय केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने और पुण्य कमाने का भी एक स्वर्णिम अवसर है. गर्मी से राहत देने वाली वस्तुएं जैसे शीतल जल, शरबत, पंखा, छाता और सूती वस्त्रों का दान इस समय इंसान को सीधे सूर्यदेव की कृपा का पात्र बनाता है. इस बार नौतपा का यह चक्र धार्मिक दृष्टिकोण से और भी खास हो गया है, क्योंकि इसके भीतर आस्था के कई बड़े केंद्र एक साथ जुड़ रहे हैं.

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26 मई: गंगा दशहरा का पावन स्नान.
27 मई: एकादशी (स्वार्थ सिद्ध, रवि और सिद्ध योग का महासंयोग).
30-31 मई: पूर्णिमा का स्नान और दान.

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