हजारीबाग नगर निगम में बाईपास सिस्टम बना भ्रष्टाचार की जड़, 50 करोड़ से अधिक घोटाले की आशंका

Hazaribagh: नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि निगम में सुनियोजित तरीके से बाईपास सिस्टम...

Hazaribagh: नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि निगम में सुनियोजित तरीके से बाईपास सिस्टम अपनाकर प्रशासनिक नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है.

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम में फाइलों की प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार म्युनिसिपल कमिश्नर के बाद डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर के माध्यम से आगे बढ़नी चाहिए, लेकिन यहां इस प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर के जरिए निर्णय लिए जा रहे हैं. इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और निर्णय प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका गहरा गई है.

अकाउंटेंट और कर्मचारियों की भूमिका पर संदेह

मामले में यह भी आरोप है कि निगम के कुछ प्रधान सहायक और लंबे समय से पदस्थापित अकाउंटेंट इस पूरे सिस्टम में अहम भूमिका निभा रहे हैं. इनके माध्यम से ऐसे कार्यों के भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है, जो जमीनी स्तर पर हुए ही नहीं हैं. यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं.

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मटवारी मार्केट आवंटन में अनियमितता के आरोप

वहीं, मटवारी मार्केट में दुकानों के आवंटन को लेकर भी गंभीर आरोप लगे हैं. बताया जा रहा है कि नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से दुकानों का आवंटन किया गया, जिससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग गया है.

निर्माण कार्यों में गड़बड़ी

निर्माण कार्यों को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है. सूत्रों का दावा है कि कई परियोजनाओं में गुणवत्ता और प्रक्रिया दोनों से समझौता किया गया है. यदि इन कार्यों की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए, तो 50 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का खुलासा हो सकता है. हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आ रहे तथ्यों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है.

उच्चस्तरीय जांच की मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर निगम की कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है. अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि इन आरोपों पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाती है.

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