हजारीबाग: यह खबर सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत और बेरुखी के बीच की उस गहरी खाई को उजागर करती है, जिसे पढ़कर किसी का भी दिल पसीज जाए. गुरुवार का दिन हजारीबाग में एक ऐसी मार्मिक कहानी लेकर आया, जहां एक ओर अपने ही रिश्तों की संवेदनहीनता देखने को मिली, तो दूसरी ओर कुछ अनजाने लोगों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी को आंखे नम कर दीं. रामगढ़ जिले के सवाल उरीमारी की रहने वाली मीणा देवी को गंभीर हालत में इलाज के लिए हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था. उम्मीद थी कि अपने साथ आए लोग उनके दुख-दर्द में साथ देंगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. इलाज के दौरान मीणा देवी ने दम तोड़ दिया. मौत के बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया.
परिचितों ने शव को अपनाने से साफ इनकार कर दिया:
साथ आए परिचितों ने शव को अपनाने से साफ इनकार कर दिया और उसे पोस्टमार्टम हाउस में लावारिस छोड़कर चले गए. एक महिला, जिसने जिंदगी भर रिश्तों को निभाया होगा, अंत में उसी के अपने उसे यूं अकेला छोड़ गए यह दृश्य हर किसी के दिल को चीर देने वाला था, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. जैसे ही इस दर्दनाक घटना की जानकारी हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल को मिली, उन्होंने तुरंत पहल की. उन्होंने मुक्तिधाम सेवा संस्थान के सचिव सह वार्ड पार्षद प्रतिनिधि नीरज कुमार से संपर्क कर महिला के ससम्मान अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने का आग्रह किया. इसके बाद जो हुआ, वह इंसानियत की एक नई मिसाल बन गया. नीरज कुमार ने बिना देर किए सारी व्यवस्था संभाली, वहीं बाबा भूतनाथ मंडली न्यास के अध्यक्ष मनोज गुप्ता ने निःशुल्क लकड़ी उपलब्ध कराकर सहयोग दिया. इन सभी के संयुक्त प्रयास से उस महिला का पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जिसे उसके अपने ही छोड़कर चले गए थे.
एक सवाल हवा में तैरता रहा क्या रिश्तों का मूल्य इतना कम हो गया है?:
श्मशान घाट पर उठती लपटों के साथ एक सवाल हवा में तैरता रहा क्या रिश्तों का मूल्य इतना कम हो गया है? और साथ ही एक सच्बाई भी सामने आई इंसानियत अभी जिंदा है, बस उसे निभाने वाले कुछ लोग ही काफी हैं. यह घटना न सिर्फ दिल को झकझोरती है, बल्कि समाज को आईना भी दिखाती है. आज मीणा देवी तो इस दुनिया से चली गई, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा ने यह सिखा दिया कि कभी-कभी गैर ही अपने बन जाते हैं, और वही सच्चे इंसान होते हैं।
