रांची: मधु कोड़ा कैबिनेट के पूर्व मंत्री और कोलेबिरा के पूर्व विधायक एनोस एक्का को सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एनोस एक्का को जमानत बेहद सख्त और अभूतपूर्व शर्तों के साथ दी है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक्का की रिहाई तभी प्रभावी होगी जब वह (CNT Act) छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध होंगे.
आदिवासी जमीन लौटाने की शर्त
सुप्रीम कोर्ट ने एनोस एक्का को इस शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है कि जेल से बाहर आने के एक सप्ताह के भीतर उन्हें उन सभी आदिवासी भूखंडों को वापस करने की प्रक्रिया में सहयोग करना होगा जिन्हें नियमों के विरुद्ध खरीदा गया था. एक्का को ट्रायल कोर्ट में लिखित शपथ पत्र देना होगा कि वह इन संपत्तियों को उनके मूल स्वरूप या वैध स्थिति में लौटाने के लिए पूर्ण सहयोग करेंगे.
CBI जांच में बड़ा खुलासा
यह पूरा मामला रांची के विभिन्न हिस्सों में खरीदी गई कीमती जमीनों से जुड़ा है. CBI ने अपनी जांच में पाया है कि ये भूखंड एनोस एक्का की पत्नी, परिजनों और उनके करीबियों के नाम पर रजिस्टर्ड हैं. इन जमीनों की खरीद में CNT Act के प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया है जो आदिवासियों की जमीन को गैर-आदिवासियों या अवैध तरीके से हस्तांतरित करने पर रोक लगाता है.
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57 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति
जांच एजेंसियों के आकलन के मुताबिक इन जमीनों का वर्तमान बाजार मूल्य 57 करोड़ रुपये से अधिक है. एनोस एक्का आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में लंबे समय से कानूनी जांच का सामना कर रहे हैं.
पहले से घिरे हैं कई मामलों में
इससे पहले उन्हें पारा शिक्षक हत्याकांड में सजा होने के बाद उनकी विधायकी भी चली गई थी. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी करोड़ों की संपत्ति पहले ही कुर्क कर रखी है. ऐसे में भूमी वापसी की शर्त पर मिली बेल उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. क्योंकि जिस ज़मीन को हासिल करने के लिए एनोस इक्का ने सभी नियम कानून का उल्लंघन किया और उसके लिए सजा पाई वह ज़मीन भी अब उनके पास नहीं रहेगी.
