Ranchi: जमानत मिलने के बाद उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक व धांधली मामले के 154 अभ्यर्थी जेल से बाहर आ गए. सभी ने 20-20 हजार के बेल बॉन्ड व दो-दो जमानतदार के साथ एजेसी योगेश कुमार की अदालत में पेशी दी. सोमवार व मंगलवार को बेल बॉन्ड व जमानतदार देने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों का रिलीज ऑर्डर जेल को भेजा.
इसके बाद सभी 154 अभ्यर्थी जेल से बाहर आ गए. बताते चलें कि शुक्रवार को अदालत ने उन सभी को जमानत की सुविधा प्रदान की थी. सोमवार को बेल बॉन्ड जमा करने व दो जमानतदारों के कोर्ट परिसर में पहुंचने से मेला जैसा नजारा था. इसे देखकर कोर्ट के अन्य मुवक्किलों को लगा कि कोर्ट में कोई बड़ी घटना हुई है. बाद में उन्हें जानकारी मिली कि वे सभी लोग बेल बॉन्ड भरने के लिए वहां जमा हुए हैं.

मास्टरमाइंड समेत कई अब भी बंद
मास्टरमाइंड अतुल वत्स तथा गिरोह के सदस्य विकास कुमार, आशीष कुमार, योगेश कुमार, मुकेश कुमार व बिहार से पकड़े गए तीन सदस्य सहित आठ आरोपी अभी भी जेल में बंद हैं. उनके अलावा पांच अभ्यर्थी भी जेल में हैं. उनके जमानत पर सुनवाई होनी है.
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क्या है पूरा मामला
बताते चलें कि उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा 13 अप्रैल को आयोजित होने वाली थी. 12 अप्रैल की रात अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए जा रहे थे. मामले में अभ्यर्थियों सहित 166 आरोपियों को तमाड़ पुलिस ने रड़गांव से गिरफ्तार किया था. उसमें सरगना सहित पांच मास्टरमाइंड, सात महिलाएं व 152 अभ्यर्थी सहित 164 आरोपी शामिल हैं. जमानत के लिए 83 याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें 78 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आरोपियों को जमानत दी गई. अदालत ने सुनवाई के दौरान केस डायरी की मांग की थी. लेकिन तमाड़ पुलिस ने केस डायरी प्रस्तुत नहीं की. जिसके कारण सुनवाई तीन बार टल चुकी थी. इस पर अदालत ने अंतिम मौका देते हुए अगली तारीख तक हर हाल में केस डायरी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. उसके बाद केस डायरी प्रस्तुत की गई और आरोपियों को जमानत मिल गई.
रड़गांव के नर्सिंग कॉलेज में हुई थी छापेमारी
तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में पुलिस छापेमारी के दौरान इस बड़े रैकेट का खुलासा हुआ था. जांच में सामने आया कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाए जा रहे थे और संगठित गिरोह इस धांधली को अंजाम दे रहा था. अभ्यर्थियों से परीक्षा से पहले तीन लाख रुपये और नियुक्ति के समय 10 लाख रुपये लेने की बात तय हुई थी. लेकिन रड़गांव में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने पर ग्रामीणों को नक्सली या आपराधिक गतिविधियों का शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ.
