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EXCLUSIVE: पाकिस्तान में छिपे गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों के विरुद्ध UAPA के तहत चलेगा केस, पुलिस ने माना आतंकी कृत्य

Ranchi: रांची पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए उसके विरुद्ध अब UAPA...

Ranchi: रांची पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए उसके विरुद्ध अब UAPA की धाराओं के तहत केस चलेगा. पुलिस ने अपनी अबतक की जांच में यह पाया है कि प्रिंस खान सिर्फ एक अपराधी नहीं है बल्कि उसके कृत्य देश के विरुद्ध युद्ध और आतंकी गतिविधि की श्रेणी में आता है.

होटल टिटॉस हत्याकांड में जुड़ी UAPA की धाराएं

रांची के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र स्थित होटल टिटॉस में रंगदारी के लिए की गई हत्या के मामले में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके सहयोगियों के विरुद्ध दर्ज केस में UAPA (Unlawful Activities (Prevention) Act) की धारा 16 , 17, 18,19 और 20 के तहत केस चलाने की अनुमति कोर्ट से मांगी थी और कोर्ट ने UAPA की धाराओं को जोड़ने के आवेदन को स्वीकार कर लिया है. जिसके बाद अब प्रिंस खान और उसके गुर्गों को UAPA के तहत आरोपी बनाया गया है. UAPA की धारा 16 और 17 आतंकी कृत्य के लिए और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन इकट्ठा करने की धारा है. धारा 18 आतंकी साजिश रचने की धारा है धारा 19 और 20 आतंकियों को शरण देना और आतंकी गिरोह का सदस्य होने से जुडी धारा है.

पाकिस्तान से चला रहा है नेटवर्क

UAPA की इन धाराओं में केस चलाने का स्पष्ट मतलब यह है कि पुलिस ने आधिकारिक तौर पर प्रिंस खान को एक सामान्य अपराधी के बजाय देश की अखंडता और शांति के लिए खतरा (आतंकवादी) मान लिया है. प्रिंस खान फिलहाल पाकिस्तान में छिपा बैठा है और वहीं से झारखंड के विभिन्न हिस्सों में अपना रंगदारी और हत्या का सिंडिकेट चला रहा है. वह डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर व्यवसायियों को धमकाने और खौफ पैदा करने का काम करता रहा है. पुलिस की इस चार्जशीट ने यह साबित कर दिया है कि प्रिंस खान के तार अब केवल अपराध से नहीं बल्कि देश विरोधी ताकतों से जुड़ चुके है.

डीएसपी पीके मिश्रा को सौंपी गई जांच

पुलिस ने माना है कि प्रिंस खान और उसके गुर्गों द्वारा की गई हत्याएं और रंगदारी की मांग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं थी, बल्कि इनका उद्देश्य देश में शांति भंग करना और जनता के मन में असुरक्षा पैदा करना है और रंगदारी से वसूले गए पैसे का उपयोग आतंकी गतिविधियों और नेटवर्क विस्तार में करना है. प्रिंस खान का गिरोह अब एक संगठित आतंकी मॉड्यूल की तरह काम कर रहा है. UAPA की धाराएं जुड़ने के बाद इस केस की कमान डीएसपी पीके मिश्रा के हाथों में दे दी गई है.

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