Ranchi : झारखंड में जल संरक्षण के दावों और पर्यावरण नीति की धज्जियां उड़ चुकी हैं. वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से जारी झारखंड की आर्द्रभूमियों (वेट लैंड) की आधिकारिक सूची ने काफी चौंकाने वाले आंकड़े पेश किये है. हैरत की बात यह है कि जल स्रोतों का क्षेत्रफल शून्य हो चुका है. भूमाफिया, कोयला खदानों और प्रशासनिक लापरवाही के इस त्रिकोण ने झारखंड को जल संकट की ओर धकेल दिया है.
हजारीबाग वेस्ट : माइनिंग की वेदी पर चढ़ गए कई ऐतिहासिक जल निकाय
हजारीबाग जिला कभी अपनी झीलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यहां की आर्द्रभूमियों का एक बड़ा हिस्सा कोयला खदानों की भेंट चढ़ चुका है. बड़कागांव और कटकमसांडी जैसे इलाकों में विकास की ऐसी आंधी दौड़ चली कि जीवित तालाब आज नक्शे से ही गायब हो चुके हैं.
• सोनबरसा वेटलैंड (प्रखंड : बड़कागांव) : क्षेत्रफल 0 हेक्टेयर – कोयला खदान के भीतर विलीन
• पोटंगा जल निकाय (प्रखंड : बड़कागांव) : क्षेत्रफल 0 हेक्टेयर – कोयला खदान के भीतर विलीन
• जर्जर आर्द्रभूमि ( प्रखंड : बड़कागांव) : क्षेत्रफल 0 हेक्टेयर – कोयला खदान के भीतर विलीन
• राजा अहर (गांव : डढ़ियाकलां, बड़कागांव) : क्षेत्रफल 0 हेक्टेयर – कोयला खदान के भीतर विलीन
• कोनहारा एक्टिव ओपन माइंस : क्षेत्रफल 0 हेक्टेयर – पत्थर खदान ने निगला.
हजारीबाग के जलाशय जो अभी भी लड़ रहे हैं जंग
• छड़वा बांध : 135.65 हेक्टेयर में फैला यह जलाशय कटकमसांडी प्रखंड की लाइफलाइन है, लेकिन प्रदूषण इस पर हावी हो रहा है.
• केरेडारी और घुटू बांध : क्रमश : 37.93 हेक्टेयर और 37.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ ये इस क्षेत्र के सबसे बड़े बांधों में से हैं.
• मसुरिया बांध : 37.09 हेक्टेयर का यह जल निकाय स्थानीय कृषि का मुख्य आधार है.
• हजारीबाग टाउन की प्रसिद्ध झीलें : हजारीबाग झील-1 (19.23 हेक्टेयर और 12.79 हेक्टेयर) शहर के बीचों-बीच स्थित हैं, जो आज कंक्रीट के अतिक्रमण की मार झेल रही हैं.
• जोर्डग बांध : केरेडारी प्रखंड में स्थित यह बांध 11.84 हेक्टेयर का है.
• चपरिकलां तालाब : 10.77 हेक्टेयर का यह तालाब ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
कोडरमा फॉरेस्ट डिवीजन : भूमाफिया के रडार पर छोटे-बड़े तालाब
• डोमचांच का तालाब : 14.83 हेक्टेयर का यह तालाब इस डिवीजन का सबसे बड़ा जल स्रोत दर्ज किया गया है.
• महथाडीह तालाब : 10.64 हेक्टेयर और 5.79 हेक्टेयर के दो बड़े जल निकाय जो अब प्रदूषण की चपेट में हैं.
• महुदानर जलाशय : 9.26 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाला यह जल निकाय स्थानीय जैव विविधता का केंद्र है.
• राजा तालाब : 5.90 हेक्टेयर में फैला यह ऐतिहासिक तालाब कोडरमा के रसूखदारों के निशाने पर है.
• तेतरियाडीह तालाब : 4.62 हेक्टेयर का यह जलाशय लगातार सिकुड़ रहा है.
• मोरियानवा जलाशय : 4.04 हेक्टेयर.
• कोरियाडीह अहर : 3.24 हेक्टेयर.
रांची और खूंटी : वीआईपी जिलों में ही सबसे ज्यादा बेकद्री
राज्य की राजधानी रांची और उससे सटा खूंटी जिला जल संकट के मुहाने पर खड़े हैं. रांची की आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है. उसके अनुपात में यहां के बड़े जलाशय कंक्रीट के जंगल में तब्दील होते जा रहे हैं.
• कांके डैम और रांची झील पर मंडराता खतरा
• कांके डैम : 132.81 हेक्टेयर का यह विशाल जलाशय रांची की एक बड़ी आबादी की प्यास बुझाता है, लेकिन इसके कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण ने इसका दम घोंट दिया है.
• रांची झील : शहर के बीच स्थित यह 19.82 हेक्टेयर की झील गंदगी और जलकुंभी का डंपिंग यार्ड बनकर रह गई है.
• हटिया डैम : 528.19 हेक्टेयर का यह विशालकाय जलाशय रांची का सबसे बड़ा वॉटर रिजर्व है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.
• सुरंगी बांध ( खूंटी) : 112.85 हेक्टेयर का यह बांध ग्रामीण इलाकों के लिए वरदान है.
• रातु का छठ घाट तालाब : 24.07 हेक्टेयर का बड़ा तालाब.
• बुंडू झील : 21.01 हेक्टेयर का जलाशय जो पर्यटन के लिहाज से भी दम तोड़ रहा है.
• नामकुम का तालाब : 14.27 हेक्टेयर.
• उरुगुटू और लोयो जलाशय : क्रमशः 12.99 हेक्टेयर और 10.61 हेक्टेयर.
देवघर जिला : बाबा नगरी के पवित्र तालाबों पर प्रदूषण का तांडव
• अजय नदी पर सिकटिया बैराज : 222.42 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ यह जिला का सबसे विशाल जल निकाय है. जो सिंचाई का बड़ा जरिया है.
• रूपसागर बांध : 9.74 हेक्टेयर.
• अंध्रो बांध : 9.05 हेक्टेयर.
• रोहिणी अहर : 8.49 हेक्टेयर का ऐतिहासिक जल निकाय.
• जलसार तालाब : 8.27 हेक्टेयर का यह बड़ा तालाब आज शहर के गंदे नालों का पानी सोखने को मजबूर है.
• सुंदर बांध और बड़का बांध : क्रमश ; 8.07 हेक्टेयर और 8.11 हेक्टेयर.
• घाघर गढ़ा तालाब : 7.26 हेक्टेयर.
• नोखिल तालाब : 6.71 हेक्टेयर.
• महूआटांड़ तालाब : 6.11 हेक्टेयर.
• शिवगंगा तालाब : 4.72 हेक्टेयर का यह परम पवित्र तालाब लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, लेकिन इसका पानी लगातार दूषित हो रहा है.
• मानसिंघी तालाब : 3.17 हेक्टेयर.
सरायकेला-खरसावां : पलाना जलाशय और औद्योगिक प्रदूषण की मार
• गंगाडीह-घोरालिंग तालाब : डेटा के मुताबिक इसका सिंचन क्षेत्र या जल फैलाव क्षेत्र 7725.94 हेक्टेयर के विशाल स्तर पर दर्ज है, जो राज्य के सबसे बड़े जलाशयों की सूची में आता है, लेकिन इस पर औद्योगिक नियमों की अनदेखी भारी पड़ रही है.
• पलाना जलाशय : 135.65 हेक्टेयर में फैला यह जलाशय इस क्षेत्र की रीढ़ है.
• सीतारामपुर तालाब : 195.99 हेक्टेयर का यह बड़ा जलाशय उद्योगों की वजह से खतरे में है.
• कासिदा जलाशय : 55.24 हेक्टेयर।
• साहब बांध : 14.45 हेक्टेयर.
सिंहभूम और लोहरदगा : हाथी परियोजना क्षेत्रों में भी संकट
• पूर्वी सिंहभूम : एलीफेंट प्रोजेक्ट जमशेदपुर के तहत आने वाली भदूडीह झील 515.19 हेक्टेयर की है, जो वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी है. अगर यह प्रदूषित हुई तो हाथियों का मानव बस्तियों में आना तय है.
• लोहरदगा (नरमा डैम) : 11.11 हेक्टेयर का नरमा बांध इस छोटे जिले की कृषि व्यवस्था को संभाले हुए है.


