Ranchi: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी को लेकर बड़ा फैसला लिया है. अब किसी भी योजना के लिए राशि की मांग तभी स्वीकार होगी, जब उसके साथ जमीनी प्रगति की रिपोर्ट और ताजा तस्वीरें संलग्न होंगी. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना प्रोग्रेस रिपोर्ट और फोटो के भेजे गए फंड मांग पत्रों पर न सिर्फ रोक लगेगी, बल्कि संबंधित कार्यपालक अभियंता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी.
निगरानी पर विशेष जोर
विभाग की ओर से जारी निर्देशों में कहा गया है कि सभी कार्यपालक अभियंता अपने-अपने क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण करें और योजनाओं की वास्तविक स्थिति पर नजर रखें. किसी भी योजना के लिए राशि की मांग करने से पहले उन्हें कार्य की प्रगति का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा.
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पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय विभागीय योजनाओं की निगरानी में पारदर्शिता लाने और कागजी प्रगति तथा जमीनी हकीकत के बीच अंतर को खत्म करने के उद्देश्य से लिया गया है. विभाग अब योजनाओं की स्थिति को केवल फाइलों के आधार पर नहीं, बल्कि मौके से प्राप्त तस्वीरों और रिपोर्ट के आधार पर परखेगा.
समीक्षा बैठक के बाद लिया गया फैसला
दरअसल, कुछ महीने पहले हुई विभागीय समीक्षा बैठक में कई योजनाओं की प्रगति को लेकर प्रस्तुत जानकारी पर सवाल खड़े हुए थे. समीक्षा के दौरान अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों और जमीनी स्थिति में अंतर सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर गंभीर चिंता जताई गई थी. इसके बाद योजनाओं की मॉनिटरिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद शुरू हुई.
इंजीनियरों की बढ़ेगी जवाबदेही
नए निर्देशों के बाद अब इंजीनियरों की जवाबदेही सीधे तौर पर तय होगी. विभाग का मानना है कि इससे योजनाओं की वास्तविक प्रगति का आकलन आसान होगा, फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और अधूरी योजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी.



