हजारीबाग जिला प्रशासन की बड़ी पहल: सुरक्षित पेयजल के लिए 23 जून तक चलेगा विशेष ‘जल जांच अभियान’, जलसहिया घर-घर जाकर परखेंगी पानी की शुद्धता

Hazaribagh:ग्रामीण इलाकों में रहने वाले नागरिकों को पूरी तरह से सुरक्षित, स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा दूषित पानी के सेवन...

Hazaribagh:ग्रामीण इलाकों में रहने वाले नागरिकों को पूरी तरह से सुरक्षित, स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा दूषित पानी के सेवन से होने वाली तमाम जानलेवा जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले भर में आगामी 23 जून 2026 तक एक महीने का विशेष “जल जांच अभियान” युद्ध स्तर पर संचालित किया जा रहा है. सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल को स्वस्थ और सुखी जीवन का मुख्य आधार बताते हुए जिला प्रशासन ने सभी हजारीबाग जिलेवासियों से अपील की है कि वे मानसून के इस दस्तक देते मौसम में अपने-अपने पेयजल स्रोतों की मुकम्मल और नियमित जांच अनिवार्य रूप से कराएं ताकि किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य जोखिम से बचा जा सके.

एफटीके किट से मौके पर ही मिलेगी पानी की शुद्धता की रिपोर्ट

 इस महत्वाकांक्षी अभियान के तकनीकी और व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर हजारीबाग की उप विकास आयुक्त श्रिया सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की है. उप विकास आयुक्त ने बताया कि जिले के प्रत्येक गांव और टोले में एक-एक जलसहिया पूरी मुस्तैदी के साथ कार्यरत हैं, जिन्हें पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा विशेष रूप से ‘फील्ड टेस्ट किट’ उपलब्ध कराया गया है. विभागीय कड़े प्रावधानों और नियमावली के अनुसार, सभी जलसहियाओं द्वारा अपने-अपने आवंटित गांवों के शत-प्रतिशत घरों में जाकर वहां मौजूद चापाकल, कुआं और बोरिंग जैसे तमाम पेयजल स्रोतों के पानी की जांच मानसून के आने के पूर्व तथा मानसून के बीत जाने के बाद अनिवार्य रूप से की जानी है. इस अभियान के जरिए ग्रामीण इलाकों के अंतिम व्यक्ति तक स्वच्छ पानी की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है.

10 घातक मानकों पर परखा जाएगा पानी, दूषित मिलने पर उपयोग पर लगेगी रोक

डीडीसी ने बताया कि जलसहियाओं को दी गई फील्ड टेस्ट किट बेहद आधुनिक है, जिसके माध्यम से पेयजल की गुणवत्ता को मुख्य रूप से कुल 10 प्रकार के कड़े वैज्ञानिक मानकों पर परखा जाता है. इन परीक्षणों में पानी का पीएच मान, टर्बिडिटी, फ्लोराइड की मात्रा, खतरनाक आर्सेनिक, नाइट्रेट, क्लोरीन का स्तर, हार्डनेस, अल्कलीनिटी एवं आयरन जैसी अति-महत्वपूर्ण रासायनिक और भौतिक जांच शामिल हैं. इन सूक्ष्म परीक्षणों के माध्यम से पानी की वास्तविक गुणवत्ता और उसमें घुले हानिकारक तत्वों का सटीक आकलन समय रहते किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण आबादी को भारी धातुओं और रसायनों से होने वाले संभावित शारीरिक व स्वास्थ्य जोखिमों से पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा.

सामूहिक सहभागिता से ही सफल होगा महा-अभियान

 जिला प्रशासन ने हजारीबाग के तमाम प्रबुद्ध नागरिकों, मुखिया, वार्ड सदस्यों और ग्रामीणों से पुरजोर अपील की है कि वे गांवों में पहुंचने वाली जलसहियाओं को इस अति-महत्वपूर्ण जांच कार्य में अपना पूर्ण और सकारात्मक सहयोग प्रदान करें. नागरिक खुद आगे बढ़कर अपने घरों तथा आसपास के सभी सार्वजनिक पेयजल स्रोतों की नियमित रासायनिक जांच अवश्य करवाएं. जिला प्रशासन ने सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि यदि जांच के दौरान किसी भी चापाकल या जल स्रोत का पानी दूषित, हानिकारक या तय मानकों से खराब पाया जाता है, तो ग्रामीण तुरंत उसके उपयोग पर रोक लगा दें और इसकी त्वरित लिखित या मौखिक सूचना पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के संबंधित पदाधिकारियों को दें ताकि उस स्रोत को दुरुस्त करने या लाल रंग से चिन्हित करने की कार्रवाई की जा सके. प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि बिना जन-भागीदारी और सामूहिक सहभागिता के स्वच्छ पेयजल का यह सपना पूरा नहीं हो सकता, इसलिए हर नागरिक इस अभियान को सफल बनाने में अपना सक्रिय योगदान दे.

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