Hazaribagh:हजारीबाग विष्णुगढ़ प्रखंड में लाखों रुपये खर्च कर गांवों को रोशन करने के उद्देश्य से लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइटें आज खुद बदहाली और अंधेरे में डूबी हुई हैं. वर्ष 2017-18 में 14वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों में स्थापित इन लाइटों का हाल अब बेहद चिंताजनक हो चुका है.कभी जिन लाइटों से गांवों में रात के अंधेरे को दूर करने की उम्मीद जगी थी, आज वे या तो खराब पड़ी हैं या फिर असामाजिक तत्वों द्वारा उनके अहम उपकरण—सोलर प्लेट, बैटरियां और एलईडी बल्ब—चोरी कर लिए गए हैं. नतीजा यह है कि अधिकांश पंचायतों में स्ट्रीट लाइटें बेकार हो चुकी हैं और गांव फिर से अंधेरे में डूबते जा रहे हैं.
चोरी की घटनाएं बनी बड़ी चुनौती
ताजा मामला विष्णुगढ़ पंचायत के टंडा स्थित मां सिंहवाहिनी मंदिर का है, जहां वर्ष 2018 में लगाई गई सोलर लाइट की पहले बैटरी और बल्ब चोरी हुए, और हाल ही में चोरों ने लोहे के भारी-भरकम खंभे को भी उखाड़ने की कोशिश की. हालांकि वजन अधिक होने के कारण खंभे को मंदिर के पीछे धर्मशाला के पास छिपाकर छोड़ दिया गया, जिसे सुबह ग्रामीणों ने बरामद कर सुरक्षित रखवाया. चेडरा समेत कई पंचायतों में एक जैसा हाल चेडरा पंचायत सहित प्रखंड के अन्य क्षेत्रों में भी स्ट्रीट लाइटों की स्थिति दयनीय बनी हुई है.कई खंभे जंग खा रहे हैं, बैटरियां गायब हैं और दर्जनों लाइटें पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी हैं. जिन लाइटों को लंबे समय तक टिकाऊ बताया गया था, वे कुछ ही वर्षों में बेकार साबित हो रही हैं.
Also Read:भारत के आमों की दिलचस्प कहानी : हर किस्म के पीछे छिपा है इतिहास और स्वाद
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर रखरखाव और निगरानी होती, तो यह स्थिति नहीं बनती. उन्होंने प्रखंड विकास पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि कम लागत में इन लाइटों की मरम्मत कर फिर से चालू किया जाए, ताकि गांवों में रोशनी लौट सके.यह मामला सिर्फ लाइटों की खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और जवाबदेही की बड़ी खामी को उजागर करता है.अब देखना होगा कि प्रशासन इस अंधेरे को दूर करने के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाता है.
