Hazaribagh: छात्र युवा अधिकार संघ, हजारीबाग इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक स्थानीय गांधी मैदान में संपन्न हुई. इस बैठक में राज्य में व्याप्त बेरोजगारी, ठप पड़ी नियुक्ति प्रक्रियाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में झारखंड सरकार की नीतियों को युवा विरोधी करार दिया.
साजिश के तहत उलझाई जा रही हैं नियुक्तियां
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जीवन यादव ने कहा, कि वर्तमान में झारखंड में सरकारी नियुक्तियों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है. सरकार बार-बार ‘भाषा नियमावली’ में बदलाव कर भर्ती प्रक्रियाओं को जानबूझकर कानूनी पेच में उलझा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि जेपीएससी और जेएसएससी जैसी संस्थाओं से छात्रों का विश्वास उठ चुका है. पेपर लीक और नकल माफियाओं पर नियंत्रण पाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है.

10 वर्षों से JTET का न होना दुर्भाग्यपूर्ण
संघ के सदस्य रविंद्र पासवान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, कि राज्य का शिक्षित युवा वर्षों से नियुक्तियों की प्रतीक्षा कर रहा है. पिछले 10 वर्षों में एक बार भी JTET परीक्षा का आयोजित न होना सरकार की उदासीनता का प्रमाण है. सरकार ऐसी खामियां छोड़ देती है जो अंततः कोर्ट में फंस जाती हैं, जिससे अभ्यर्थियों का कीमती समय और उम्र दोनों बर्बाद हो रहे हैं.
भर्तियों को लटकाने की मंशा
राधे मेहता ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस और लोवर डिवीजन क्लर्क जैसी भर्तियों के आवेदन लेकर उन्हें वर्षों तक खींचना युवाओं के साथ क्रूर मजाक है. दरोगा और ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से बहाली न निकालना यह दर्शाता है कि सरकार रोजगार देने के प्रति गंभीर नहीं है.
बाहरी भाषा का प्रयोग और पलायन का दंश
अभिषेक कुमार और विनय कुमार ने क्षेत्रीय भाषाओं की उपेक्षा पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में बाहरी भाषाओं को प्राथमिकता देना झारखंडी युवाओं को उनकी अपनी माटी में हक से वंचित करने की साजिश है. रोजगार के अभाव में यहाँ का युवा मानसिक तनाव झेल रहा है और दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर है.
आंदोलन की चेतावनी
अंत में नीरज यादव और देव कुमार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तत्काल दोषमुक्त नियमावली लागू कर पुलिस, दरोगा और शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से शुरू नहीं की गई, तो छात्र युवा अधिकार संघ राज्यव्यापी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा.
