हाउसिंग कॉलोनी जमीन विवाद: कागजी दावों और जमीनी कब्जे के बीच उलझा मामला, सदर सीओ की कार्यशैली पर सवाल

Palamu: जिले के मेदिनीनगर शहर की हाउसिंग कॉलोनी से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यशैली पर...

Palamu: जिले के मेदिनीनगर शहर की हाउसिंग कॉलोनी से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.यहां कागज कुछ और कहते हैं,जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती है और दावा कोई और कर रहा है.बताया जा रहा है कि हाउसिंग कॉलोनी में स्थित करीब 64 डिसमिल जमीन की कीमत पांच से छह करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इस बेशकीमती जमीन पर दो पक्ष अपना-अपना मालिकाना हक जता रहे हैं और दोनों के पास कागजात मौजूद हैं.

क्या पूरा मामला, जानिए

एक पक्ष राजकिशोर प्रजापति और उनके भाइयों का है, जिनका दावा है कि उन्होंने यह जमीन वर्ष 2005 में रामदुलारी देवी से खरीदी थी. उनका कहना है कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से जमीन पर काबिज हैं और नियमित रूप से बिजली बिल व होल्डिंग टैक्स का भुगतान कर रहे हैं.वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि उन्होंने यह जमीन रामदुलारी देवी के परिवार की अर्चना कौशिक से खरीदी है. उनके अनुसार पहले जमीन खाता नंबर 32 और प्लॉट नंबर 21 में थी, जिसे बाद में संशोधित कर प्लॉट नंबर 23 कर दिया गया. जबकि वर्तमान विवादित जमीन खाता नंबर 84 और प्लॉट नंबर 23 बताई जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चौहद्दी समान होने के बावजूद खाता और प्लॉट नंबर में बदलाव कैसे हुआ.

सदर सीओ पर गंभीर लगे आरोप

इस मामले में राजकिशोर प्रजापति और उनके भाइयों ने सदर सीओ जागो महतो पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि मोटी रकम लेकर एकतरफा फैसला सुनाया गया है. साथ ही जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल नंद यादव पर भी सवाल उठाए गए हैं.हालांकि, दूसरी ओर नंद यादव और प्रमोद यादव ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए प्रशासन पर भरोसा जताया है. उनका कहना है कि दूसरा पक्ष ही जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है.

फिलहाल अंचल कार्यालय की ओर से इस पूरे मामले पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. पीड़ित परिवार ने अब उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि कागजी दस्तावेज और जमीनी हकीकत के बीच का सच सामने आ सके.

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