Jamtara: जुरगुडीह में मंगलवार को सिदो- कान्हू निर्माण समिति के तत्वावधान में हूल दिवस श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर वीर शहीद सिदो-कान्हू को श्रद्धांजलि अर्पित की. पूरे आयोजन स्थल पर आदिवासी संस्कृति, परंपरा और हूल क्रांति की गौरवगाथा का जीवंत वातावरण देखने को मिला.
सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई. समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों तथा ग्रामीणों ने वीर शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया. श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि सिदो-कान्हू ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा अंग्रेजी हुकूमत के अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका था. उनका बलिदान आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित करता है. वक्ताओं ने युवाओं से अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने की अपील की. श्रद्धांजलि सभा के बाद आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने पूरे आयोजन में चार चांद लगा दिए. कुरकुटांड़ (पूर्वी टुंडी) से आए महिला एवं पुरुष कलाकारों ने पारंपरिक संथाली गीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं. कलाकारों की प्रस्तुति पर दर्शक देर तक झूमते रहे और पूरा परिसर पारंपरिक संस्कृति के रंग में रंग गया.


रंगारंग प्रस्तुति
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध आदिवासी कलाकार टीना हेंब्रम और स्टीफन टुडू की रंगारंग प्रस्तुति रही. दोनों कलाकारों ने अपने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से उपस्थित लोगों का भरपूर मनोरंजन किया. आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में लोग आयोजन में पहुंचे, जिससे पूरे दिन उत्सव जैसा माहौल बना रहा. इस अवसर पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने सिद्धू-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. समिति के सदस्य सिद्धेश्वर मुर्मू के नेतृत्व में मंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया.
सिदो-कान्हू का बलिदान झारखंड की अस्मिता और आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक
सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सिदो-कान्हू का बलिदान झारखंड की अस्मिता और आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के संघर्षों को कभी भुलाया नहीं जा सकता. अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी राजनीतिक हमला बोला. मंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद लंबे समय तक भाजपा की सरकार रही, लेकिन राज्य के संसाधनों का समुचित विकास नहीं हो सका. उन्होंने आरोप लगाया कि यहां की खनिज संपदा का दोहन हुआ, जबकि आदिवासी समाज की अपेक्षाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिस व्यक्ति पर भरोसा किया, उसी ने उनके साथ विश्वासघात किया. कार्यक्रम के अंत में समिति की ओर से सभी अतिथियों एवं कलाकारों को सम्मानित किया गया. आयोजन की सफलता पर समिति के अध्यक्ष बुदीनाथ हेंब्रम ने सभी आगंतुकों, कलाकारों और ग्रामीणों के प्रति आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष बुदीनाथ हेंब्रम, सिद्धेश्वर हेंब्रम, रूपलाल, सुरज, मुकेश बास्की, अशोक सिंह, रघुनाथ गोस्वामी, शिव प्रकाश हेंब्रम सहित समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे.
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