Hazaribagh: ईचाक प्रखंड के परासी गांव स्थित ऐतिहासिक गोहाई पोखर उर्फ राजा पोखर की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों ने तालाब क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण, गंदगी और प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता जताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र की यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खो सकती है.
तालाब की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि पोखर के किनारे और सरकारी भूमि पर अवैध रूप से दुकानें संचालित की जा रही हैं. उन्होंने अंचल प्रशासन से तालाब क्षेत्र की मापी कराने और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को निजी उपयोग में बदलने की कोशिशों पर रोक लगनी चाहिए.
छठ घाट की बदहाली से श्रद्धालु परेशान
ग्रामीणों ने बताया कि राजा पोखर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है. छठ महापर्व के दौरान यहां हजारों श्रद्धालु अर्घ्य देने पहुंचते हैं, लेकिन तालाब के आसपास फैली गंदगी और कूड़ा-कचरा इसकी पवित्रता और सौंदर्य को प्रभावित कर रहा है. लोगों ने नियमित सफाई और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
सड़क किनारे अव्यवस्थित वाहन संचालन
पोखर के आसपास मुख्य सड़क पर टेंपो और अन्य वाहनों के अवैध जमावड़े से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि जाम की स्थिति के कारण राहगीरों और स्कूली बच्चों को काफी परेशानी होती है. उन्होंने प्रशासन से अलग टेंपो स्टैंड बनाने की मांग की है ताकि सड़क पर आवागमन सुचारू हो सके.
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी स्थल का निरीक्षण कर अतिक्रमण, सफाई और यातायात से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करेंगे. उनका कहना है कि राजा पोखर केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसे संरक्षित किया जाना जरूरी है.



