Ranchi/Delhi: झारखंड में निर्यात को नई रफ्तार देने और उद्योगों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं. इस सिलसिले में झारखंड के श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर राज्य की जरूरतों से अवगत कराया. साथ ही उन्होंने एक विस्तृत पत्र सौंपकर झारखंड के लिए आवश्यक व्यापारिक और निर्यात संबंधी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का आग्रह किया. पत्र में मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा और औद्योगिक क्षमता के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. देश के कुल खनिज भंडार का बड़ा हिस्सा और स्टील उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान होने के बावजूद राज्य को निर्यात के लिए जरूरी संस्थागत सुविधाएं अब तक पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाई हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में सात लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) संचालित हैं, जिन्हें बेहतर व्यवस्था मिलने पर वैश्विक बाजार तक पहुंचाया जा सकता है.
यह भी पढ़ें: परिसीमन में आदिवासी आरक्षित सीटें घटने की आशंका, 30 अगस्त को होगी ‘आदिवासी एकता महारैली’

झारखंड में DGFT का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने की मांग
मंत्री ने केंद्र सरकार से झारखंड में डीजीएफटी (DGFT) का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित करने की मांग की, ताकि आयात-निर्यात से जुड़े लाइसेंस और अन्य स्वीकृतियां व्यापारियों को राज्य में ही आसानी से मिल सके. इसके अलावा राज्य में ड्राई पोर्ट की स्थापना, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल का कार्यालय खोलने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप टेस्टिंग लैब स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा गया, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता की जांच झारखंड में ही संभव हो सके. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र की उड़ान, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और पीएम गति शक्ति जैसी योजनाओं का लाभ राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए, ताकि गांवों और छोटे कस्बों में तैयार होने वाले उत्पाद भी विदेशी बाजारों तक पहुंच सके.
यह भी पढ़ें: सुरक्षा वापस, सियासत शुरू: मंत्री जी का त्याग है या सरकार पर प्रहार, महागठबंधन के भीतर कोऑर्डिनेशन का नया क्लाइमेक्स
अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधाओं से लैस करने की मांग
पत्र में रांची और देवघर हवाई अड्डों को अंतरराष्ट्रीय कार्गो सुविधाओं से लैस करने की मांग भी की गई है. साथ ही रांची, जमशेदपुर और देवघर में निर्यात से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे स्थानीय उद्यमियों और व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की प्रक्रियाओं की बेहतर जानकारी मिल सके. मंत्री का कहना है कि यदि केंद्र सरकार इन प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो झारखंड देश के प्रमुख निर्यात केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है.


