JPSC सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने जारी किया पांच वर्षों का वित्तीय और परिसंपत्ति विवरण, पारदर्शिता को बताया प्राथमिकता

Ranchi/Hazaribagh: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और अभिलेखीय स्पष्टता की भावना से वित्तीय...

Dr. Jamal Ahmed
डॉ. जमाल अहमद द्वारा जारी वित्तीय एवं परिसंपत्ति प्रकटीकरण

Ranchi/Hazaribagh: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और अभिलेखीय स्पष्टता की भावना से वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की अपनी एवं अपनी पत्नी डॉ. हलीमा खातून की आय, परिसंपत्तियों तथा देयताओं का विस्तृत सार्वजनिक प्रकटीकरण जारी किया है. जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने पांच वर्षों की वित्तीय स्थिति के साथ-साथ पारिवारिक संपत्तियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी स्पष्ट की है.

डॉ. जमाल अहमद की संचयी आय 1,85,50,441 रुपये दर्ज 

प्रकटीकरण के अनुसार, संबंधित पांच वर्षों की अवधि में आयकर विवरणियों (ITR) के आधार पर डॉ. जमाल अहमद की संचयी आय 1,85,50,441 रुपये रही, जबकि उनकी पत्नी डॉ. हलीमा खातून की संचयी आय 60,57,944 रुपये दर्ज की गई. इस प्रकार दोनों की संयुक्त पांच वर्षीय संचयी आय 2,46,08,385 रुपये रही है.

87,81,280 रुपये का एक आवासीय फ्लैट किया गया अर्जित 

परिसंपत्तियों के विवरण में बताया गया है, कि उक्त अवधि के दौरान प्रमुख रूप से 1,596 वर्ग फुट क्षेत्रफल का एक आवासीय फ्लैट अर्जित किया गया, जिसका घोषित मूल्य 87,81,280 रुपये है. इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में कोई वाहन, सोना अथवा आभूषण अर्जित नहीं किए गए, जिसे प्रकटीकरण में “Nil” दर्शाया गया है.

देयताओं के संबंध में जारी विवरण के अनुसार, आवासीय फ्लैट के लिए 59,19,000 रुपये का बैंक ऋण लिया गया है. इसके अतिरिक्त वर्ष 2016 में लिया गया 20,00,000 रुपये का ऋण भी प्रकटीकरण में शामिल किया गया है, क्योंकि वह पांच वर्षीय अवधि के दौरान निरंतर देयता के रूप में विद्यमान रहा. वहीं डॉ. हलीमा खातून द्वारा वर्ष 2023 में लिया गया 15,00,000 रुपये का ऋण भी इस सार्वजनिक प्रकटीकरण में सम्मिलित किया गया है. साथ ही स्पष्ट किया गया है कि ये ऋण राशियां मूल अथवा घोषित ऋण राशि हैं और वर्तमान बकाया राशि माने जाने से पूर्व संबंधित बैंक अभिलेखों से सत्यापन आवश्यक होगा.

पारिवारिक संपत्तियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी किया गया उल्लेख

डॉ. जमाल अहमद ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में पारिवारिक संपत्तियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया है. उन्होंने बताया कि उनके परदादा स्व. खुदा बख्श के स्वामित्व वाली कुछ भूमि आज भी अविभाजित है और उसका पारिवारिक बंटवारा नहीं हुआ है. उनके दादा स्व. मोहम्मद इस्माइल, जो सरकारी कर्मचारी थे, ने उपलब्ध जानकारी के अनुसार अपने जीवनकाल में कोई संपत्ति अर्जित नहीं की थी. उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता स्व. जमील अहमद, जो हजारीबाग न्यायालय में अधिवक्ता तथा वर्ष 1992 से 2002 तक सरकारी वकील रहे, ने अपने जीवनकाल में दो मकानों का निर्माण कराया तथा कुछ भूमि अर्जित की थी. हालांकि वह भूमि आज भी अविभाजित है और उत्तराधिकारियों के बीच उसका विधिवत विभाजन नहीं हुआ है.

कोई अन्य महत्वपूर्ण चल या अचल संपत्ति नहीं की अर्जित 

डॉ. जमाल अहमद ने स्पष्ट किया कि पैतृक अथवा अविभाजित पारिवारिक संपत्तियों को वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान उनके द्वारा व्यक्तिगत रूप से अर्जित संपत्ति नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने यह भी घोषित किया कि उक्त आवासीय फ्लैट के अतिरिक्त, पिछले पांच वर्षों में, जिसमें JPSC सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद की अवधि भी शामिल है, उन्होंने कोई अन्य महत्वपूर्ण चल या अचल संपत्ति अर्जित नहीं की है.

प्रेस विज्ञप्ति के अंत में डॉ. जमाल अहमद ने कहा कि यह सार्वजनिक प्रकटीकरण सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना से जारी किया गया है. उन्होंने बताया कि प्रस्तुत सभी विवरण उपलब्ध आयकर विवरणियों, वित्तीय सूचनाओं एवं पारिवारिक अभिलेखों पर आधारित हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित बैंक रिकॉर्ड, स्वामित्व दस्तावेज एवं उत्तराधिकार संबंधी अभिलेखों के माध्यम से इनका सत्यापन किया जा सकता है.

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