कोडरमा: ‘लोकतंत्र की ताकत संवाद है, दमन नहीं’, कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रकाश रजक का केंद्र पर निशाना

Koderma: जिला कांग्रेस कमेटी, कोडरमा के जिलाध्यक्ष प्रकाश रजक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक...

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सोनम वांगचुक आंदोलन पर कांग्रेस का तीखा हमला

Koderma:  जिला कांग्रेस कमेटी, कोडरमा के जिलाध्यक्ष प्रकाश रजक ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संवाद, असहमति के सम्मान और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार में निहित होती है.

संवाद की जगह बल प्रयोग लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

प्रकाश रजक ने कहा कि जब जनता के सवालों का जवाब संवाद के बजाय प्रशासनिक शक्ति, पुलिस बल और प्रतिबंधों के माध्यम से दिया जाता है, तो यह किसी मजबूत लोकतंत्र का नहीं, बल्कि सत्ता की असहजता और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति का संकेत है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उससे यह संदेश गया है कि लोकतांत्रिक मांगों को शांतिपूर्वक उठाने वालों की आवाज़ दबाने का प्रयास किया जा रहा है.

केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बढ़ा है और जनता की आवाज़ सुनने के बजाय उसे नियंत्रित करने की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन को पुलिस बल के सहारे दबाया जा सकता है, लेकिन जनता की भावनाओं और लोकतांत्रिक चेतना को कभी दबाया नहीं जा सकता.

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा

प्रकाश रजक ने कहा कि यदि सरकार को अपनी नीतियों और निर्णयों पर विश्वास है, तो उसे संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सदैव संविधान, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण जनआंदोलनों के अधिकार के साथ खड़ी रही है और आगे भी प्रत्येक नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी.उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों, छात्रों और जागरूक नागरिकों की आवाज़ को दबाने के बजाय सरकार को उनसे संवाद स्थापित कर उनके मुद्दों का लोकतांत्रिक समाधान निकालना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल चुनावों से नहीं, बल्कि असहमति का सम्मान करने, जनता की बात सुनने और संविधान की मर्यादा का पालन करने से होती है.

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