Lohardaga: वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क की मरम्मत को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार गुहार लगाने के बाद भी कोई पहल नहीं होने पर आखिरकार ग्रामीणों ने खुद जिम्मेदारी उठाई. कुड़ू प्रखंड के लावागाई से ऐने और बाधा तक करीब दो किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क की मरम्मत ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से कर दी. हाथों में कुदाल, टोकरी और कड़ाही लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण सुबह से ही सड़क पर उतर गए और पूरे दिन मेहनत कर सड़क को दोबारा वाहन चलने योग्य बना दिया.
लाइफलाइन बनी सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि लावागाई से होकर लोहरदगा सदर प्रखंड के ऐने, बाघा, नदीनगड़ा, रामपुर, बख्शी, नगड़ा सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क इसी सड़क से जुड़ा हुआ है. यह सड़क क्षेत्र के किसानों, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए लाइफलाइन का काम करती है. किसान अपनी उपज इसी मार्ग से कुड़ू और लोहरदगा बाजार तक पहुंचाते हैं, जबकि सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रतिदिन इसी रास्ते से विद्यालय और कॉलेज आते-जाते हैं.

जर्जर सड़क बनी परेशानी
समय के साथ सड़क पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई थी. बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी. बाइक और चारपहिया वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया था, जबकि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था. कई बार राहगीर दुर्घटना का शिकार भी हुए. ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार प्रखंड प्रशासन, जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव तथा सांसद सुखदेव भगत को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
श्रमदान से मरम्मत
प्रशासनिक उदासीनता से नाराज ग्रामीणों ने बैठक कर स्वयं श्रमदान के माध्यम से सड़क की मरम्मत करने का निर्णय लिया. इसके बाद बिरसा ग्लोबल स्कूल के संचालक संजय कुमार साहू ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए सड़क मरम्मत के लिए आवश्यक मोरम और डस्ट उपलब्ध कराने की सहमति दी. पिछले दो दिनों में लगभग 50 ट्रैक्टर मोरम और डस्ट सड़क पर गिराया गया. रविवार सुबह ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान करते हुए गड्ढों को भरने, सड़क समतल करने और पूरे मार्ग को आवागमन योग्य बनाने का कार्य पूरा किया.
प्रशासन को संदेश
ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क पहले ग्रेड-वन सड़क के रूप में बनाई गई थी, लेकिन लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण इसकी स्थिति अत्यंत खराब हो गई थी. उन्होंने कहा कि यदि समय पर मरम्मत होती रहती तो आज उन्हें स्वयं सड़क बनाने के लिए श्रमदान नहीं करना पड़ता. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह अभियान केवल सड़क मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन को यह संदेश देने का प्रयास है कि यदि जनसमस्याओं की अनदेखी होती रही तो लोग अपने अधिकारों के लिए स्वयं आगे आने को मजबूर होंगे.
बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल
श्रमदान अभियान में बिरसा ग्लोबल स्कूल के संचालक संजय कुमार साहू, रंजीत उरांव, अशोक उरांव, सुखदेव उरांव, बिराज उरांव, सोमनाथ उरांव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया. विभिन्न विद्यालयों के कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक श्रमदान कर सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया.
स्थायी निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का शीघ्र स्थायी निर्माण कराया जाए, ताकि आने वाले दिनों में किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अब भी इस सड़क के स्थायी निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई, तो क्षेत्र के लोग व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे.


