Ranchi: भाजपा विधायक दल नेता बाबूलाल मरांडी द्वारा खदानों की नीलामी को लेकर झारखंड सरकार पर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस प्रवक्ता अख्तर अली ने पलटवार करते हुए मरांडी के बयान को भ्रामक, जनविरोधी और कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने की छटपटाहट करार दिया. अख्तर अली ने कहा कि जल-जंगल-जमीन लूट भाजपा का मॉडल है, जबकि हेमंत सरकार आदिवासियों और पर्यावरण की रक्षक है.
आदिवासियों को उनकी ही जमीनों से किया जा रहा बेदखल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि बाबूलाल मरांडी झारखंड की तुलना उड़ीसा और छत्तीसगढ़ से कर रहे हैं, जहां भाजपा और उनके सहयोगियों की नीतियों के कारण आदिवासियों को उनकी ही जमीनों से बेदखल किया जा रहा है और बिना ग्राम सभा की सहमति के हसदेव जैसे समृद्ध जंगलों को काटा जा रहा है. भाजपा का मॉडल अंधाधुंध खनन और कॉर्पोरेट लूट का है, जबकि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार का मॉडल सतत विकास और जल-जंगल-जमीन का संरक्षण है.
आगे अख्तर अली ने खदानों की नीलामी पर केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार बताते हुए स्पष्ट किया, कि देश में प्रमुख खनिजों और कोयला ब्लॉकों के आवंटन एवं नीलामी की गाइडलाइंस केंद्र सरकार तय करती है. जब केंद्र सरकार ने बिना सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के झारखंड के संवेदनशील वन क्षेत्रों की नीलामी करने की कोशिश की थी, तब हमारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट तक जाकर झारखंड के वनों और विस्थापित होने वाले आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ी थी, हम राज्य को केवल पूंजीपतियों की तिजोरी भरने का जरिया नहीं बनने देंगे.
सारंडा क्षेत्र में पलायन और बेरोजगारी को लेकर भाजपा बहा रही घड़ियाली आंसू
उन्होंने सारंडा क्षेत्र में पलायन और बेरोजगारी के आरोपों पर कहा, कि भाजपा इस मुद्दे पर केवल घड़ियाली आंसू बहा रही है, बाबूलाल को अगर यहां के युवाओं का इतना ही चिंता है, तो केंद्र सरकार के पास झारखंड की माइनिंग रॉयल्टी और बकाये एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये प्रधानमंत्री से झारखंड के हक का यह पैसा क्यों नहीं दिलवाते? इस राशि से राज्य के लाखों युवाओं को रोजगार और सारंडा क्षेत्र का ऐतिहासिक विकास सुनिश्चित हो सकता है.
