जंगली पगडंडी के सहारे जिंदगी जी रहा दाहुदाग, एक शिक्षक के भरोसे स्कूल, विकास की बाट जोह रहे ग्रामीण

Hazaribagh: जिले के चुरचू प्रखंड अंतर्गत इंद्रा पंचायत का दाहुदाग गांव आज भी आधुनिक भारत की तस्वीर से कोसों दूर है. आजादी...

Hazaribagh: जिले के चुरचू प्रखंड अंतर्गत इंद्रा पंचायत का दाहुदाग गांव आज भी आधुनिक भारत की तस्वीर से कोसों दूर है. आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी यहां के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. चारों ओर घने जंगलों और पहाड़ों की तलहटी में बसे इस गांव के लिए पक्की सड़क आज भी एक सपना बनी हुई है.

ग्रामीणों का कहना है कि चरही रेलवे स्टेशन से मात्र सात किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद इस गांव तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित सड़क नहीं है. ग्रामीणों को ऊबड़-खाबड़ और पथरीली पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है. बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब जंगली रास्ता चलने लायक नहीं रहता. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद आज तक किसी अधिकारी ने गांव की सुध नहीं ली.

शिक्षा पर संकट, एक शिक्षक के भरोसे स्कूल

गांव के नव प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी दयनीय है. यहां कुल 28 बच्चे नामांकित हैं, जिन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी महज एक सहायक शिक्षक रिजुन महतो पर है. विद्यालय के चारों ओर घना जंगल होने के कारण छात्र-छात्राएं हमेशा डर के साये में रहते हैं. विद्यालय भवन भी जर्जर हो चुका है, जिसके कारण शिक्षक बच्चों को कमरे के भीतर बैठाने से भी कतराते हैं.

Also Read: झारखंड पुलिस में ASI से SI प्रोन्नति दो साल से अटकी, अधूरा रह गया दारोगा बनने का सपना

नेटवर्क की समस्या, मानदेय पर भी असर

तकनीकी युग में भी यह गांव नेटवर्क की समस्या से जूझ रहा है. आलम यह है कि नेटवर्क नहीं होने के कारण सहायक शिक्षक अपनी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाते हैं. विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायत देने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ. उल्टा उपस्थिति दर्ज नहीं होने के कारण शिक्षक का सितंबर माह का मानदेय रोक दिया गया है.

पानी और बिजली का भी बुरा हाल

गांव के चापाकल खराब पड़े हैं, जिससे पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. ग्रामीणों को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. बिजली की आपूर्ति भी भगवान भरोसे है. खराब चापाकलों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *