रांची: दिल्ली से सटे नोएडा के फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हिंसा कोई तात्कालिक गुस्सा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गहरी साजिश थी, जिसका मुख्य सूत्रधार एनआईटी जमशेदपुर का पूर्व छात्र आदित्य आनंद है. आदित्य आनंद मूल रूप से हजारीबाग का रहने वाला है. उल्लेखनीय है कि 13-14 अप्रैल 2026 को नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें, तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी.
सुनियोजित साजिश और मुख्य आरोपी
पुलिस के अनुसार, हजारीबाग का रहने वाला आदित्य आनंद, जिसने जमशेदपुर एनआईटी से बीटेक किया है, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है. जांच में पता चला है कि आदित्य अकेले काम नहीं कर रहा था, उसके साथ बिहार का रहने वाला ऑटो चालक रूपेश रॉय और मनीषा चौहान भी शामिल थे. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रूपेश और मनीषा को 11 अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया है, हालांकि मुख्य आरोपी आदित्य आनंद अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.
डिजिटल तरीके से भड़काई गई भीड़
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने प्रदर्शन से पहले ही इसकी जमीन तैयार कर ली थी. ये तीनों आरोपी 31 मार्च और एक अप्रैल को ही नोएडा आ गए थे. नौ और दस अप्रैल को उन्होंने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में घूम-घूम कर क्यूआर कोड स्कैन करवाए. इन कोड्स के जरिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए, जिनमें हजारों मजदूरों को जोड़ा गया. इन्हीं ग्रुप्स के माध्यम से भड़काऊ संदेश भेजकर मजदूरों को हिंसा के लिए उकसाया गया.
पाकिस्तान से जुड़ा ‘टूलकिट’ कनेक्शन
नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जब नोएडा के फेज-2 में पत्थरबाजी और आगजनी हो रही थी, ठीक उसी समय सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें फैलाई जा रही थीं. साइबर सेल की जांच में दो एक्स (ट्विटर) हैंडल अनुषी तिवारी और मीर इलियास की पहचान हुई है. इन हैंडल से मजदूरों की मौत की झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो साझा किए जा रहे थे. तकनीकी जांच में स्पष्ट हुआ है कि ये दोनों अकाउंट पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे. पुलिस का मानना है कि इन बाहरी ताकतों का मुख्य उद्देश्य भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में अशांति फैलाकर आर्थिक स्थिरता को चोट पहुंचाना था.
आदित्य आनंद और उसके साथियों का इतिहास भी संदिग्ध रहा है
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक आदित्य साल 2020 से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले आंदोलनों को हिंसक मोड़ देने में सक्रिय रहा है. इन आरोपियों की मौजूदगी दिल्ली में हुए CAA-NRC प्रदर्शनों के दौरान भी पाई गई थी. फिलहाल नोएडा पुलिस ने फरार आदित्य की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की हैं. पुलिस उन व्हाट्सएप ग्रुप्स के डेटा को भी खंगाल रही है, ताकि इस साजिश में शामिल अन्य स्थानीय चेहरों की पहचान की जा सके. प्रशासन ने औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और मजदूरों से किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है.
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