Palamu : मेदिनीनगर निगम की बोर्ड बैठक उस समय पूरी तरह से हंगामे में बदल गई जब डस्टबिन वितरण और आवारा कुत्तों को पकड़ने की योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए. बैठक के दौरान पार्षदों ने आरोप लगाया कि कागजों में जहां सैकड़ों डस्टबिन की खरीद और वितरण दिखाया गया है, वहीं जमीनी स्तर पर इसका आधा भी काम नजर नहीं आ रहा है. इसी मुद्दे को लेकर पार्षदों और निगम प्रशासन के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद नाराज पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया. इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि शहर की सफाई व्यवस्था और जनहित के मुद्दे पहले से ही संकट में बताए जा रहे हैं.
डस्टबिन योजना पर उठे गंभीर सवाल
बैठक में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा डस्टबिन वितरण योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई है. उनका कहना है कि कागजों में करीब 500 डस्टबिन का बिल स्वीकृत कराया गया, जबकि जमीनी स्तर पर प्रति वार्ड केवल लगभग 100 डस्टबिन ही पहुंचे हैं. पार्षदों ने इसे सीधे तौर पर जनता के पैसों का दुरुपयोग बताया और उच्च स्तरीय जांच की मांग की.

कुत्ता पकड़ने की योजना भी सवालों के घेरे में
आवारा कुत्तों को पकड़ने की योजना को लेकर भी पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि रिकॉर्ड में कुत्तों को पकड़कर दर्ज किया गया है, लेकिन धरातल पर ऐसी कोई गतिविधि नजर नहीं आई। इससे योजना की पारदर्शिता और वास्तविक क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं.
मेयर और प्रशासन की प्रतिक्रिया
मेयर अरुणा शंकर ने भी इस पूरे मामले पर नाराजगी जताई और निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के कागजों में आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में सभी कार्रवाइयों की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके.
भुगतान विवाद और प्रशासनिक सफाई
नगर निगम प्रशासन की ओर से बताया गया कि कुत्ता पकड़ने वाली एजेंसी का भुगतान पिछले आठ महीनों से लंबित है, जिसके कारण कार्य प्रभावित हो सकता है. हालांकि, मेयर ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भुगतान का मुद्दा अलग है, लेकिन कार्यों का वास्तविक क्रियान्वयन और रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी होना चाहिए.
जांच के आदेश और आगे की कार्रवाई
मेयर ने निर्देश दिया कि अब से हर वार्ड में होने वाली कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी. साथ ही जांच समिति को सभी मामलों की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल रिकॉर्डिंग के बिना किसी भी योजना को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.
शहर की बुनियादी समस्याओं पर भी नाराजगी
बैठक में मौजूद पार्षदों ने शहर की बिगड़ती स्थिति पर भी नाराजगी जताई. उनका कहना था कि सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है, जगह-जगह कचरे का अंबार लगा है और पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है, लेकिन निगम प्रशासन जनहित के मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहा है.
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