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पीएम आयुष्मान योजना की अवधि विस्तार, झारखंड के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूती के लिए तीन अरब 85 करोड़, गुणवत्ता से समझौता किया तो नपेंगे अधिकारी

Ranchi: झारखंड की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के लिए केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना पीएम आयुष्मान भारत हल्थ इंफ्रास्ट्रक्टर...

पीएम आयुष्मान योजना
पीएम आयुष्मान योजना

Ranchi: झारखंड की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को विश्वस्तरीय बनाने के लिए केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना पीएम आयुष्मान भारत हल्थ इंफ्रास्ट्रक्टर मिशन को आगामी 30 सितंबर तक के लिए बड़ा विस्तार मिल गया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत इस योजना को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए झारखंड सरकार ने कुल तीन अरब 85 करोड़ खर्च कर को हरी झंडी दे दी है. इस महा-योजना के तहत राज्य में हेल्थ सब-सेंटर्स, ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स और मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक का एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जाएगा. झारखंड सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केन्द्रांश और राज्यांश को मिलाकर कुल  एक अरब 25 करोड़ की अग्रिम आवंटन राशि भी तुरंत विमुक्त कर दी है. अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस विभागीय आदेश के तहत अब राज्य से लेकर जिला स्तर के सिविल सर्जनों तक को सीधे तौर पर जवाबदेह बना दिया गया है, ताकि काम की गुणवत्ता में कोई समझौता न हो.

केन्द्रांश और राज्यांश का हिस्सा

  • कुल स्वीकृत योजना राशि: 3,85,00,00,000 (तीन अरब पचासी करोड़ रुपये)
  • केन्द्रांश मदः2,31,00,00,000 (दो अरब इकतीस करोड़ रुपये)
  • राज्यांश मदः1,54,00,00,000 (एक अरब चौवन करोड़ रुपये)
  • केन्द्रांश मद में 75 करोड़ और मैचिंग शेयर 50 करोड़ जारी

स्वास्थ्य विभाग की पांच बड़ी प्राथमिकताएं 

भवन विहीन उपकेन्द्रों का कायाकल्प: राज्य के ग्रामीण इलाकों में चल रहे ऐसे स्वास्थ्य उप-केंद्र जिनके पास अपनी सरकारी बिल्डिंग नहीं है, उनके लिए अत्याधुनिक नए भवनों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा.

शहरी स्वास्थ्य वेलनेस केन्द्र : शहरों की गरीब और स्लम आबादी को उनके घर के नजदीक ही प्राथमिक चिकित्सा और ओपीडी सेवाएं देने के लिए अर्बन हेल्थ वेलनेस सेंटर्स को सुदृढ़ किया जाएगा.

प्रखंड लोक स्वास्थ्य इकाई : हर ब्लॉक (प्रखंड) स्तर पर बीमारियों की निगरानी और त्वरित जांच के लिए पब्लिक हेल्थ यूनिट्स का गठन और सुदृढ़ीकरण होगा.

जिला समेकित लोक स्वास्थ्य प्रयोगशाला: महामारी और गंभीर संक्रामक रोगों की स्थानीय स्तर पर सटीक जांच के लिए जिलों में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब्स बनाई जाएंगी.

अस्पतालों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक : सबसे बड़ा बदलाव जिला स्तर के अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में देखने को मिलेगा। जिला अस्पतालों में 100 या 50 बेड की क्षमता वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक और राज्य के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 बेड के विशेष क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए जाएंगे, ताकि वेंटिलेटर, आईसीयू और आपातकालीन चिकित्सा के लिए मरीजों को रांची या राज्य के बाहर न भागना पड़े.

वित्तीय नियम के ये होंगी शर्तें

  • अब योजना का पैसा किसी भी कमर्शियल बैंक या फिक्स्ड डिपॉजिट में रोक कर नहीं रखा जा सकेगा.
  • भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से राशि सीधे तभी ट्रांसफर होगी जब वेंडर को भुगतान करना होगा यानी ‘जस्ट इन टाइम’ व्यवस्था लागू रहेगी.
  • निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी के रूप में राज्य स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख और जिला स्तर पर संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को अधिकृत किया गया है.

गुणवत्ता से समझौता किया तो नपेंगे अधिकारी

  • नो डुप्लिकेशन (दोहरीकरण पर रोक): अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को यह कड़ा निर्देश दिया गया है कि वे जमीन पर काम शुरू कराने से पहले यह शत-प्रतिशत सुनिश्चित कर लें कि जिस भवन या लैब का निर्माण इस फंड से हो रहा है, उस पर किसी दूसरी योजना से पैसा न लिया गया हो.
  • समान रूप से जवाबदेही तय: भवन निर्माण या उपकरणों की खरीद में गुणवत्ता के उच्चतम मानदंडों का पालन करना अनिवार्य होगा.
  • झारखंड कोषागार संहिता का पालन: सभी सिविल सर्जनों को झारखंड कोषागार संहिता के नियम 174 का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
  • कंट्रोलिंग अथॉरिटी: इस पूरी योजना के लिए मुख्य नियंत्रक पदाधिकारीस्वयं अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखण्ड होंगे.
  • कैग और स्टेट ऑडिट को खुली छूट: भारतीय अंकेक्षण एवं लेखा विभाग (सीएजी) तथा राज्य वित्त (अंकेक्षण) विभाग को इस योजना से संबंधित सभी बही-खातों, कैश बुक्स, और वाउचरों की कभी भी जांच-पड़ताल और स्पेशल ऑडिट करने का पूर्ण वैधानिक अधिकार होगा.
  • समय पर यूसी अनिवार्य: हर जिले के सिविल सर्जन और आहरण पदाधिकारी ससमय अपना उपयोगिता प्रमाण पत्र अभियान निदेशक, एनएचएम और निदेशक प्रमुख को सौंपेंगे.

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