Ranchi: मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज कही जाने वाली भारी इंजीनियरिंग निगम के कर्मचारियों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. एक तरफ जहां कर्मचारी 29 से 34 महीने के बकाया वेतन के बावजूद पूरी निष्ठा से उत्पादन में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रबंधन द्वारा उन्हें डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया है. एचईसी मजदूर संघ की बैठक जीतू लोहारा की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कर्मचारियों ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए. कर्मियों का कहना है कि जब वे भेल से आए प्रभारी निदेशकों से वेतन और भविष्य के काम के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें जवाब मिलता है, सिर्फ काम करो, पेमेंट का मत पूछो. हद तो तब हो गई जब दोबारा सवाल करने पर अटेंडेंस काटने और सस्पेंड करने की सीधी धमकी दी गई.
यह भी पढ़ें: मोदी सरकार की त्याग वाली नसीहत पर कांग्रेस का पलटवार: कहा- ‘जनता त्याग नहीं, चाहती है जवाब’

कर्मियों का आरोप
• अतिरिक्त कार्य: 8 घंटे की जगह 12 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन कोई एक्स्ट्रा बेनिफिट नहीं मिलता.
• सुरक्षा का अभाव: कैंटीन, एंबुलेंस और सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी है. दुर्घटना होने पर घायलों को ऑटो या निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ता है.
• प्रशासनिक खेल: आरोप है कि अस्थायी निदेशक जानबूझकर मजदूरों को उकसा रहे हैं ताकि अशांति फैले और वे अपनी राजनीति साध सकें.
यह भी पढ़ें: सरायकेला: DMFT प्रबंधन समिति की बैठक, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर जोर
सरकार से गुहार: बचा लीजिए एचईसी
आर्थिक तंगी के कारण कर्मचारियों के बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. संघ ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति की जाए और नए कार्यादेश सुनिश्चित किए जाएं. कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि शीर्ष अधिकारी ही नए लेबर कोड का उल्लंघन करेंगे, तो वे अपनी फरियाद लेकर कहां जाएंगे?
