Ranchi: झारखंड में आगामी खरीफ सीजन पर मंडराते सूखे के खतरे को देखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों की आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करना है.
जुलाई अंत तक तैयारी पूरी करने का लक्ष्य
विश्वविद्यालय के कुलपति एससी दुबे ने दो टूक शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक बीज वितरण से लेकर जल संरक्षण की तमाम तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं. उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता किसानों को अधिकतम राहत पहुंचाना है.

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ये दिए गए निर्देश
• वैकल्पिक खेती: पानी की कमी होने पर खेत खाली छोड़ने के बजाय खरीफ सब्जियों और इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया जाए.
• एकीकृत कृषि: किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन और बागवानी अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए.
• कंटीजेंट प्लान: राज्य के सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों ने संभावित सूखे से निपटने के लिए अपनी-अपनी आकस्मिक योजनाओं का प्रेजेंटेशन दिया.
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