वाटर प्लांट की तकनीकी खराबी से गिरिडीह में जल संकट गहराया, माले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

Giridih: शहर के चैताडीह वाटर प्लांट में आई तकनीकी खराबी के कारण शहर के कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है....

वाटर प्लांट की तकनीकी खराबी से गिरिडीह में जल संकट गहराया
वाटर प्लांट की तकनीकी खराबी से गिरिडीह में जल संकट गहराया

Giridih: शहर के चैताडीह वाटर प्लांट में आई तकनीकी खराबी के कारण शहर के कई इलाकों में पेयजल संकट गहरा गया है. प्लांट में आई खराबी की वजह से अगले दो से तीन दिनों तक नियमित जलापूर्ति बाधित रहने की आशंका जताई जा रही है. इस स्थिति से चैताडीह, भंडारीडीह, कृष्णा नगर, पचंबा समेत दर्जनों मोहल्लों के लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. गर्मी और उमस के बीच जलापूर्ति प्रभावित होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है.

वाटर प्लांट का जायजा

मामले की जानकारी मिलने के बाद माले नेता राजेश सिन्हा अपने सहयोगियों के साथ चैताडीह वाटर प्लांट पहुंचे और वहां की स्थिति का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्लांट के कर्मचारियों से खराबी के कारणों और मरम्मत कार्य की प्रगति की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि शहर की बड़ी आबादी इसी जलापूर्ति व्यवस्था पर निर्भर है, ऐसे में प्लांट में खराबी आने के बावजूद नगर निगम की ओर से समय रहते आम लोगों को कोई व्यापक सूचना नहीं दी गई. साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था भी नहीं की गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है.

नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल

राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पूरी तरह लापरवाहीपूर्ण है. उनका कहना था कि प्लांट से पानी टंकी तक पहुंचने में लगभग 15 घंटे का समय लगना अपने आप में व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है. यदि जलापूर्ति प्रणाली का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण किया जाता, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती.

मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी

उन्होंने नगर निगम प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शहर की मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है. विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन पेयजल जैसी बुनियादी व्यवस्था लगातार बदहाल बनी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित के कार्यों की जगह कमीशनखोरी और खानापूर्ति पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.

नगर विकास मंत्री से मांग

माले नेता ने राज्य के नगर विकास मंत्री से मांग की कि गिरिडीह शहर के सभी जलापूर्ति केंद्रों, वाटर प्लांटों और पानी की टंकियों की व्यापक तकनीकी जांच कराई जाए. साथ ही जहां भी मरम्मत की आवश्यकता है, उसे तत्काल पूरा कराया जाए तथा सभी जलमीनारों और टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ और निर्बाध पेयजल उपलब्ध हो सके.

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वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की मांग

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक चैताडीह वाटर प्लांट पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक नगर निगम को प्रभावित मोहल्लों में टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए. साथ ही नागरिकों को जलापूर्ति बहाल होने की संभावित समय-सीमा और मरम्मत कार्य की प्रगति की नियमित जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए.

आंदोलन की चेतावनी

निरीक्षण के दौरान माले नेता राजेश सिन्हा के साथ बबलू सानू, उमेश, चंदन और रियाज सहित अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र जलापूर्ति बहाल नहीं हुई और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो आम जनता के साथ आंदोलन करने पर भ किया जाएगा.

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