Ranchi : राजधानी रांची के लालपुर थाना क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर देर रात तक संचालित होने वाले ‘धुनकी रूफटॉप बार’ पर एक बार फिर पुलिस का डंडा चला है. शनिवार देर रात करीब एक बजे लालपुर थाना पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर बार को बंद कराया. हैरान करने वाली बात यह है कि बीते एक महीने के भीतर इस बार पर पुलिस की यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है, जिससे साफ है कि बार प्रबंधन के हौसले किस कदर बुलंद हैं.
देर रात बज रहा था डीजे, शराब के नशे में थिरक रहे थे नाबालिग
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात धुनकी रूफटॉप बार में तय समय सीमा के बाद भी नियमों के विरुद्ध बेहद तेज आवाज में डीजे बज रहा था और शराब का दौर धड़ल्ले से जारी था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, बार के भीतर सैकड़ों युवक-युवतियां नशे में चूर होकर थिरक रहे थे. सबसे गंभीर बात यह है कि इस लेट-नाइट पार्टी में कई नाबालिग भी मौजूद थे, जिन्हें कानूनन शराब परोसना और ऐसी जगहों पर प्रवेश देना सख्त मना है.
पुलिस को देखते ही मची अफरा-तफरी, सड़क पर लगा लंबा जाम
बार में चल रही इस अवैध एक्टिविटी की सूचना स्थानीय निवासियों ने लालपुर थाना पुलिस को दी. सूचना मिलते ही पुलिस की पेट्रोलिंग टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस को देखते ही बार के भीतर हड़कंप मच गया और लोग इधर-उधर खिसकने लगे. युवक-युवतियां आनन-फानन में नीचे उतरकर अपनी गाड़ियों की तरफ भागे, जिसके कारण बाहर सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और देर रात जाम की स्थिति पैदा हो गई.

अस्पताल के ठीक बगल में हुड़दंग, मरीजों की आफत
धुनकी रूफटॉप बार के ठीक बगल में केसी रॉय मेमोरियल अस्पताल स्थित है. रात भर होने वाले इस तेज डीजे के शोर और शराबी हुड़दंगियों के हल्ले-गुल्ले के कारण अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीज सो तक नहीं पाते हैं. स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने पहले भी इसकी दर्जनों बार शिकायत की है. बार के मैनेजर अमित पटेल को पुलिस और प्रशासन की तरफ से कई बार सख्त चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन प्रबंधन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है.
हाईकोर्ट के कड़े आदेशों और जिला प्रशासन के नियमों की अवहेलना
हाल ही में झारखंड उच्च न्यायालय ने शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि रात दस बजे से लेकर सुबह छह बजे तक लाउड साउंड, डीजे और किसी भी तरह की तेज ध्वनि पर पूरी तरह रोक रहेगी. इसके बावजूद धुनकी बार में जिला प्रशासन और हाईकोर्ट के निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. स्थानीय बुद्धिजीवियों और निवासियों का कहना है कि शहर के रिहायशी इलाकों में रात-रात भर इस तरह के बार खुले रहने से न सिर्फ ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि अवैध ड्रग्स की बिक्री और अन्य आपराधिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है. अब देखना यह होगा कि तीन बार की कार्रवाई के बाद प्रशासन इस बार का लाइसेंस रद्द करने जैसी कोई ठोस कार्रवाई करता है या नहीं.
