Ranchi: झारखंड में इस बार मानसून ने जो दगा दिया है, उसने पूरे राज्य के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. आसमान में बादलों की गड़गड़ाहट तो हुई, लेकिन खेतों की प्यास बुझाने के लिए जो पानी बरसना चाहिए था, वह सिर्फ एक छलावा साबित हुआ. हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि राज्य के 24 में से लगभग हर जिले में सामान्य से बेहद कम बारिश दर्ज की गई है. खेती-किसानी पर संकट के काले बादल मंडरा रहे हैं और अगर यही रफ्तार रही, तो झारखंड को इस साल भीषण सूखे का सामना करना पड़ सकता है.
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पूरे राज्य में 54 फीसदी कम हुई बारिश
पूरे झारखंड की बात करें तो सिर्फ दुमका इकलौता ऐसा जिला रहा जहां सामान्य रूप से 198.9 मिलीमीटर के मुकाबले 198.3 मिलीमीटर बारिश हुई, यानी यहां विचलन शून्य (0%) रहा. दुमका को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी जिले रेड जोन में हैं. सिमडेगा में 28% और जामताड़ा में 36% बारिश कम हुई हैं. जबकि देवघर में 61 फीसदी, पूर्वी सिंहभूम में 64 फीसदी, गिरिडीह में 63 फीसदी, खूंटी में 60 फीसदी और पश्चिम सिंहभूम 43 फीसदी बारिश कम हुई है. कुल मिलाकर पूरे झारखंड में इस अवधि के दौरान 189.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन हुई है सिर्फ 86.5 मिलीमीटर. सूबे में कुल 54% कम बारिश दर्ज की गई है.
साहिबगंज और गढ़वा में हाहाकार, 90% से ज्यादा की भारी कमी
सबसे बदतर स्थिति साहिबगंज की है, जहां सामान्य तौर पर 227 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वहां सिर्फ 3.2 मिलीमीटर पानी गिरा है, यानी 99% कम बारिश हुई है. गढ़वा में 132.4 मिलीमीटर के मुकाबले महज 9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो कि 93% की कमी को दर्शाता है. चतरा में 160.5 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 35.4 मिलीमीटर बारिश हुई है, यानि 78 फीसदी कम है. गोड्डा में 36.3 मिलीमीटर यानि 79% और कोडरमा में 35.1 मिलीमीटर यानि 77 फीसदी कम बारिश हुई है. पलामू में भी सामान्य से 80% कम पानी बरसा है.
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राजधानी रांची से लेकर धनबाद-बोकारो तक सब मायूस
राजधानी रांची में 197.6 मिलीमीटर की जगह 146.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो कि 26% कम है. हालांकि यह बाकी जिलों से थोड़ी बेहतर है. धनबाद में 57%, बोकारो में 68% और हजारीबाग में 71% की भारी गिरावट ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों की कमर तोड़ कर रख दी है.


