News Wave Desk : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना और धार्मिक आस्था का महीना माना जाता है. इस दौरान लोग पूजा-पाठ के साथ-साथ खान-पान में भी विशेष सावधानी बरतते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में प्याज, लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा कई लोग हरी पत्तेदार सब्जियां, बैंगन और बासी भोजन से भी परहेज करते हैं. बरसात के मौसम में वातावरण में नमी और उमस बढ़ जाती है. ऐसे में हरी पत्तेदार सब्जियों में मिट्टी, छोटे कीड़े और बैक्टीरिया लगने की संभावना बढ़ जाती है. अगर इन्हें अच्छी तरह साफ करके न पकाया जाए, तो पेट से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं. इसी वजह से सावन में इन सब्जियों को लेकर सावधानी बरतने की परंपरा रही है.
सावन में ताजा भोजन क्यों है जरूरी?
वहीं, बैंगन में भी बरसात के मौसम में कीड़े लगने की संभावना अधिक मानी जाती है. पुराने समय में इसी कारण सावन के दौरान बैंगन खाने से परहेज किया जाता था. सावन के दौरान बासी भोजन खाने से बचने की सलाह दी जाती है. इस मौसम में वातावरण में नमी और गर्मी अधिक होने के कारण भोजन जल्दी खराब हो सकता है. ऐसे भोजन का सेवन करने से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे अपच, पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ सकता है. सावन में ताजा, हल्का और स्वच्छ भोजन करने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका स्वास्थ्य से भी गहरा संबंध है. इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह निषिद्ध मानने के बजाय मौसम के अनुसार संतुलित आहार अपनाना और भोजन की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना अधिक आवश्यक है.
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