Saraikela : जिले के कुकड़ू प्रखंड अंतर्गत तिरुलडीह थाना क्षेत्र के सपारूम वन क्षेत्र में मंगलवार रात करंट लगने से 30 वर्षीय नर हाथी की मौत हो गई, अगर यह गजराज जीवित रहता तो आने वाले समय में एक बड़ा टस्कर बनता और जंगल की शोभा बढ़ाता, स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ असामाजिक तत्व नहीं चाहते थे कि हाथी सपारूम वन क्षेत्र में आए, क्योंकि इस इलाके में लगातार हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं हो रही थीं, सवाल उठ रहा है कि इस मासूम गजराज की क्या गलती थी जो इंसानों की करतूत से उसकी जान चली गई.
क्या है सही मौत का कारण
पोस्टमार्टम कर भेजे गए सैंपल चांडिल वन क्षेत्र पदाधिकारी की मौजूदगी में डॉक्टरों की टीम ने हाथी का पोस्टमार्टम किया, शरीर के अंदर के कुछ अंगों के सैंपल उच्चस्तरीय जांच के लिए रांची स्थित फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं, जांच से मौत के सही कारणों का पता चलेगा, पोस्टमार्टम के बाद जेसीबी से गड्ढा खोदकर पूरे राजकीय सम्मान के साथ हाथी को दफनाया गया, इस दौरान ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, सभी ने ‘गणपति बप्पा’ कहकर गजराज को श्रद्धांजलि अर्पित की, ग्रामीणों ने कहा कि जब तक गजराज की धड़कन चल रही थी, तब तक उसे भगाने को मजबूर थे, पर आज अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं.
क्यों असुरक्षित हैं वन्य जीव?:
मानव और हाथी संघर्ष के पीछे कई राज छिपे हैं, जंगल में पौष्टिक आहार और पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने के कारण हाथी रोज शाम ढलते ही भोजन की तलाश में गांव में प्रवेश कर जाते हैं, दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से सटे इस इलाके में हाथी कॉरिडोर अतिक्रमण और अवैध बालू खनन से बाधित हो गया है, यह ध्यान देने का विषय है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और वन एवं पर्यावरण विभाग को ठोस कदम उठाने चाहिए, दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में ‘गज परियोजना’ के तहत हाथियों के लिए पर्याप्त भोजन, पानी और सुरक्षित कॉरिडोर सुनिश्चित करना होगा, वरना मानव-हाथी संघर्ष में ऐसे ही बेजुबान जानवरों की जान जाती रहेगी.
