Bermo: बोकारो जिला सहित बेरमो अनुमंडल में कोयले का अवैध धंधा एक बार फिर पूरी धमक के साथ शुरू हो गया है. निवर्तमान पुलिस कप्तान हरबिंदर सिंह के तबादले से एक सप्ताह पहले बंद हुआ यह काला कारोबार नए एसपी नाथू सिंह मीणा के आने के बाद भी महज सवा महीने ही शांत रहा. इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक वरदहस्त मिलते ही तस्करों ने दुगुनी रफ्तार से काम शुरू कर दिया.

आम जनता और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि बोकारो में पुलिस कप्तानों की तैनाती इस अवैध कारोबार को बंद रखने के लिए नहीं, बल्कि इसे सुचारू रूप से संचालित करवाने के लिए की जाती है. हाल के महीनों में पेंक नारायणपुर, नावाडीह, दुगदा, पेटरवार, कथारा, तेनुघाट, बोकारो थर्मल, महुआटांड़, चतरो चट्टी और जगेश्वर विहार जैसे थाना क्षेत्रों से जिस तरह कोयले की बेखौफ तस्करी हो रही है, वैसी पहले कभी नहीं देखी गई.

थाना प्रभारियों पर भी लगे गंभीर आरोप
इस अवैध धंधे को रोकने के लिए गोमिया के पूर्व विधायकों डॉ. लंबोदर महतो और दिवंगत माधवलाल सिंह सहित जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने काफी प्रयास किए, लेकिन नतीजा सिफर रहा. तस्करों और स्थानीय पुलिस का गठजोड़ इस कदर गहरा हो चुका है कि बेरमो के कुछ थाना प्रभारी खुद पिक-अप गाड़ियां खरीदकर तस्करों के साथ पार्टनरशिप में धंधा चला रहे हैं.
पूर्व एसपी का सख्त निर्देश था कि बोकारो से बाहर हजारीबाग और गिरिडीह के कोल डिपो व फैक्ट्रियों में अवैध कोयला नहीं जाना चाहिए, इसके बावजूद पेंक नारायणपुर के थानेदार की शह पर गिरिडीह के पोरदाग स्थित कोल फैक्ट्रियों में बाइक, पिक-अप और ट्रैक्टरों से कोयला भेजने का सिलसिला दिन-रात जारी रहा.
आज स्थिति यह है कि कोयला कारोबारी खुलेआम ऊपर तक अपनी सेटिंग होने का दावा करते हैं. पेंक नारायणपुर, दुग्धा, पेटरवार और महुआटांड़ की बंद पड़ी कोयला फैक्ट्रियों को दोबारा चालू कर दिया गया है और कई थानों के संरक्षण में ट्रकों के जरिए बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी हो रही है.

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गर्भवती महिला की हत्या के बाद गरमाई सियासत
इस अवैध धंधे और खाकी-खादी के संरक्षण ने तस्करों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि वे अब कानून व्यवस्था को ठेंगे पर रख चुके हैं. इसी दुस्साहस का नतीजा रहा कि बेरमो थाना क्षेत्र के अमलो रेलवे साइडिंग में तस्करों और उनके गुर्गों ने अनीता देवी नामक एक गर्भवती महिला की पीट-पीटकर बेरहमी से हत्या कर दी गई.
इस जघन्य हत्याकांड के बाद देर रात तक इस पर सियासी रोटियां सेकी जाती रहीं, 17 घंटे तक शव रखकर सड़क जाम रहा, जबकि राजनीति करने वाले तमाम चेहरों को इस काले धंधे और इसके असली आकाओं की पूरी सच्चाई अच्छी तरह मालूम है.
कोयले के इस खेल पर विधायक सरयू राय का नजरिया बेहद तल्ख और स्पष्ट है. उनका सीधा आरोप है कि बोकारो और धनबाद जिले में शासन, प्रशासन और पुलिस खुद मिलकर इस अवैध कारोबार को चला रहे हैं. यदि पुलिस प्रशासन सिर्फ एक घंटे के लिए ईमानदार और सख्त हो जाए, तो कोयला तस्करी पर पूरी तरह लगाम लग सकती है, लेकिन जब रखवाले ही इस काले धंधे में हिस्सेदार बन चुके हों, तो इसे रोकना नामुमकिन है.
उनके पास इस भ्रष्टाचार के पर्याप्त सबूत हैं, लेकिन व्यवस्था में बैठे लोग आंखें मूंदे हुए हैं. हाल ही में पेटरवार थाना क्षेत्र के खेतको से अवैध कोयला लेकर निकलने वाले ट्रकों की नंबर सहित जानकारी बोकारो के एसपी और डीसी को लगातार दी गई थी, लेकिन रसूखदारों के दबाव और तंत्र की मिलीभगत के कारण धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि यहां कानून नहीं, बल्कि तस्करों का राज चल रहा है.
