Chatra: राजपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गड़िया गांव निवासी प्रमोद कुमार हत्याकांड का चतरा पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में पथेल गांव निवासी सुनील कुमार पिता बैजनाथ और सुनील कुमार पिता विकास सिंह भोगता शामिल हैं. पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त गमछा, रस्सी का टुकड़ा, तीन मोबाइल फोन, मृतक का मोबाइल तथा सात जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. मामले की शुरुआत में पुलिस प्रेम-प्रसंग समेत कई अन्य बिंदुओं पर जांच कर रही थी. मृतक के पिता की शिकायत पर राजपुर थाना में अपहरण का मामला दर्ज किया गया था. इसी दौरान गड़िया पुल के समीप नदी की बालू में गाड़ा हुआ शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान प्रमोद कुमार के रूप में हुई.

मोबाइल और सोशल मीडिया जांच से बदली जांच की दिशा

पुरानी कचहरी स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में SDPO सन्नी वर्धन ने बताया कि शव बरामदगी के बाद पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी के निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया. जांच के दौरान प्रमोद के मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन पड़ताल की गई. विभिन्न लड़कियों से हुई चैटिंग के आधार पर प्रेम-प्रसंग की दिशा में भी जांच हुई, लेकिन तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों ने जांच का रुख बदल दिया.

अवैध हथियार के नाम पर लिए थे 40 हजार रुपये
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रमोद कुमार ने अपने कुछ दोस्तों से अवैध हथियार उपलब्ध कराने के नाम पर करीब 40 हजार रुपये एडवांस लिए थे. पैसे लेने के बावजूद वह हथियार उपलब्ध नहीं करा रहा था. इसी को लेकर उसके दोस्तों में नाराजगी बढ़ती गई और विवाद हत्या तक पहुंच गया. अनुसंधान में यह भी पता चला कि प्रमोद ने हथियार आपूर्ति के नाम पर मिले पैसों से एक आईफोन खरीद लिया था. आरोपी लगातार उस पर हथियार उपलब्ध कराने का दबाव बना रहे थे. जब उन्हें लगा कि प्रमोद उनकी मांग पूरी नहीं करेगा, तब उन्होंने उसकी हत्या की साजिश रची और उसे मौत के घाट उतार दिया.
ALSO READ : खिलाड़ियों का दर्द कब सुनेगी सरकार, राष्ट्रीय खिलाड़ी नौकरी की कर रहे मांग
शव को बालू में गाड़कर मिटाने की कोशिश की गई थी साक्ष्य
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को नदी की बालू में गाड़ दिया ताकि साक्ष्य मिटाए जा सकें. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक नाबालिग को निरुद्ध किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त सामग्री और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए. SDPO सन्नी वर्धन ने बताया कि जांच के दौरान कई संदिग्धों से भी पूछताछ की गई. परिजनों, ग्रामीणों, तकनीकी साक्ष्यों और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हत्या के पीछे मुख्य वजह अवैध हथियारों के लेनदेन का विवाद था. हालांकि मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
शेष आरोपियों की तलाश में जारी है छापेमारी
पुलिस शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है. इस मामले के खुलासे में एसडीपीओ सन्नी वर्धन, सदर इंस्पेक्टर विपिन कुमार, राजपुर थाना प्रभारी रुपेश कुमार, एसआई अमित कुमार गुप्ता, एसआई संदीप प्रसाद वर्मा, तकनीकी शाखा और सशस्त्र बल के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. प्रेम-प्रसंग के शक से शुरू हुई जांच आखिरकार अवैध हथियारों के सौदे तक पहुंची और पुलिस ने एक जघन्य ब्लाइंड मर्डर केस का खुलासा कर दिया. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध हथियारों के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.
