Ranchi: झारखंड में बिजली आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए अपनी जान दांव पर लगाने वाले आउटसोर्सिंग और मानव दिवस (संविदा) कर्मचारी इस वक्त बेहद असुरक्षित माहौल में काम करने को मजबूर हैं. झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ ने निगम प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के विभिन्न सप्लाई एरिया बोर्ड में काम करने वाले जमीनी बिजली कर्मियों की सुरक्षा पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दी गई है. संघ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार और प्रबंधन ने अपनी नींद नहीं तोड़ी, तो राज्य भर में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: रांची में कल पॉलीटेक्निक परीक्षा: सेंटर्स के 200 मीटर के दायरे में BNSS की धारा-163 लागू, जानें क्या हैं पाबंदियां

हादसे आधा दर्जन, पर विभाग अब भी चिरनिद्रा में
श्रमिक संघ के अध्यक्ष अजय राय ने विभागीय उदासीनता पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हाल के दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लाइन ठीक करने के दौरान आधा दर्जन से अधिक गंभीर हादसे हो चुके हैं. इन हादसों में कई बेकसूर कर्मचारियों की जान चली गई, तो कई हमेशा के लिए अपाहिज हो गए. बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इन हादसों के बाद भी न तो बिजली विभाग जागा और न ही ठेका लेने वाली एजेंसियों ने पीड़ित परिवारों की सुध ली.
न सुरक्षा उपकरण मिले, न मुआवजा
अजय राय ने कहा कि अगर इन गरीब श्रमिकों को अनिवार्य सुरक्षा उपकरण, सही ट्रेनिंग और काम के दौरान सुरक्षा मानक दिए जाते, तो कई घरों के चिराग बुझने से बच सकते थे. जान जोखिम में डालकर काम कराना सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
यह भी पढ़ें: विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली डॉ. मेघा रानी से मिले अनिल अमिताभ पन्ना, दी बधाई
श्रमिक संघ ने अल्टीमेटम के साथ रखीं 3 मांगें
• हाल ही में हुए सभी हादसों की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों व दोषी एजेंसियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए.
• मृतक और गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों के परिवारों को अविलंब आर्थिक सहायता और नौकरी दी जाए.
• सभी सप्लाई एरिया में ग्राउंड स्टाफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाएं.


