Koderma: जिले के मरकच्चो थाना क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. आए दिन हाथियों का झुंड घरों, चारदीवारी और फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है. अब हाथियों ने विद्यालय को भी निशाना बनाकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. ताजा मामला मरकच्चो थाना क्षेत्र के मुर्कमनाय पंचायत स्थित उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय चिल्होटांड का है, जहां गुरुवार रात हाथियों ने स्कूल परिसर में घुसकर भारी नुकसान पहुंचाया.
स्कूल का गेट तोड़कर गोदाम में मचाई तबाही
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात जंगली हाथियों के झुंड ने स्कूल का मुख्य गेट तोड़ दिया और परिसर में प्रवेश कर गया. हाथियों ने गोदाम का दरवाजा क्षतिग्रस्त कर अंदर रखे खाद्यान्न और अन्य सामान को बर्बाद कर दिया. शुक्रवार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले ग्रामीणों ने गेट टूटा देखा और इसकी सूचना विद्यालय प्रबंधन को दी.
चावल खाया, दाल-तेल और किताबें भी कीं बर्बाद
विद्यालय सचिव अशोक सिंह ने बताया कि गुरुवार शाम सभी कमरों में ताला लगाकर वे घर चले गए थे. शुक्रवार सुबह स्कूल पहुंचने पर परिसर में हाथियों के पैरों के निशान और मल-मूत्र मिले. गोदाम में रखे चार बोरे चावल में से कुछ हिस्सा हाथियों ने खा लिया, जबकि बचा हुआ चावल, दाल, तेल, आलू, मसाले, किताबें, कॉपियां और विद्यालय के कई जरूरी दस्तावेज पूरी तरह तहस-नहस हो गए.
चारदीवारी नहीं होने से बढ़ा खतरा
विद्यालय सचिव अशोक सिंह ने बताया कि स्कूल में चारदीवारी नहीं होने के कारण हाथी आसानी से परिसर में घुस गए. उन्होंने कहा कि चारदीवारी निर्माण के लिए विभाग और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित और मौखिक रूप से आग्रह किया गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि यदि स्कूल की चारदीवारी बनी होती, तो शायद इस तरह की घटना नहीं होती.
ग्रामीणों में दहशत, सुरक्षा की उठी मांग
घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है,ग्रामीणों ने वन विभाग और जनप्रतिनिधियों से विद्यालय की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द चारदीवारी निर्माण कराने और हाथियों के बढ़ते आतंक पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.
वन विभाग पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली हाथियों की लगातार आवाजाही और उत्पात की जानकारी वन विभाग को पहले से है. इसके बावजूद हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
