लोकसभा में आज पेश होगा सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, तीन महीने में पूरी करनी होगी सुनवाई

NewsWave Desk : केंद्र सरकार आज यानी सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी....

डॉ. जितेंद्र सिंह

NewsWave Desk : केंद्र सरकार आज यानी सोमवार को लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 पेश करेगी. कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस बिल को सदन के पटल पर रखेंगे. यह सात मुख्य संशोधन पेश करता है. जिसका मकसद नीट यूजी 2026 परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ियों के बाद परीक्षा आयोजन में आ रही गड़बड़ियों को दूर करना, खास न्यायिक तंत्र बनाना और आपराधिक मुकदमों में तेजी लाना है. जानकारी हो कि सीजेपी CJP के आंदोलन के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया. इसके पहले सीजेपी CJP आंदोलन के दौरान मानसून सत्र का संचालन विधिपूर्वक नहीं हो पा रहा था. ऐसे में अब सरकार शिक्षा सुधारों पर कार्य करने के लिये तटस्थ है. ऐसे में नया बिल सदन के समक्ष रखा जायेगा.

छात्रों और विपक्षी दलों ने बनाया था दबाव

इस बार मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ. जहां सीजेपी के आंदोलन और विपक्षी दलों के दबाव के कारण सरकार पर लगातार दबाव था. सीजेपी CJP ने नीट पेपर लीक के मुद्दे पर पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की थी. अब इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार बिल पेश करने वाली है. इस कानून का मकसद जांच-न्यायिक कार्यवाही दोनों के लिए सख्त समय सीमा तय करके मूल 2024 के ढांचे में बड़े बदलाव करना है.

तीन महीने में पूरी होनी है सुनवाई

इस बिल के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों में सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर काम करने का अधिकार दिया जाएगा. यह खास तौर पर इस कानून के तहत अपराधों की सुनवाई करेंगे. विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्यवाही रोजाना के आधार पर होना चाहिए. चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी होनी चाहिए. गंभीर या एक से ज्यादा राज्यों से जुड़े परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों को संभालने के लिए केंद्र के पास एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाने का अधिकार होगा.

राज्य सरकार सलाहकार नियुक्त कर सकती है

इस कानून के तहत अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी. राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को परीक्षा में गड़बड़ियों के मुकदमे के लिए खास तौर पर कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का अधिकार होगा. संगठित पेपर लीक के दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों, कोचिंग सेंटरों और सर्विस प्रोवाइडरों के लिए जेल की सजा और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान होगा.

 

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