रांची: झारखंड समेत पुरे देशभर भर में 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक अग्निशमन सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है. इसी कड़ी में झारखण्ड गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन विभाग के डीजी एमएस भाटिया के निर्देश पर आम जनता, स्कूलों और कारखानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और अपील जारी की है. विभाग का मुख्य उद्देश्य सतर्कता ही सुरक्षा है के मंत्र के साथ आग से होने वाली जन-धन की हानि को शून्य पर लाना है.
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के लिए अनिवार्य नियम:
डीजी एमएस भाटिया के निर्देश पर अग्निशमन विभाग के द्वारा जारी गाइडलाइन में स्पष्ट किया है, कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है. इसके लिए स्कूलों के हर मंजिल, लैब और रसोई के पास पर्याप्त संख्या में फायर एक्सटिंगुइशर होने चाहिए, साथ ही, धुआं उठते ही बजने वाले स्मोक डिटेक्टर लगाना अनिवार्य है. साल में कम से कम दो बार ‘फायर ड्रिल’ करानी होगी ताकि छात्र और कर्मचारी आपात स्थिति में सुरक्षित बाहर निकलना सीख सकें. स्कूल के एग्जिट गेट चौड़े और बाधा मुक्त होने चाहिए, जिन पर स्पष्ट रूप से एग्जिट के संकेत लगे हों.

बिजली से होने वाली आग, क्या करें और क्या न करें?:
अग्निशमन विभाग के द्वारा जारी गाइडलाइन में कहा गया है,कि अक्सर शॉर्ट सर्किट आग का सबसे बड़ा कारण बनता है. इससे बचने के लिए विभाग ने सख्त हिदायत दी है. विभाग के द्वारा कहा गया है कि हमेशा आईएसआई प्रमाणित उपकरणों और सही रेटिंग वाले फ्यूज और एमसीबी का ही उपयोग करें. एक सॉकेट में एक ही उपकरण लगाएं और घर से बाहर जाते समय मेन स्विच बंद कर दें.कभी भी घटिया क्वालिटी के बिजली उपकरण न खरीदें. तारों को कालीन या पायदान के नीचे न बिछाएं, क्योंकि तार टूटने से शॉर्ट सर्किट का खतरा रहता है. सॉकेट में कभी भी नंगा तार (बिना प्लग के) न डालें. अग्निशमन विभाग के द्वारा जारी गाइडलाइन में कहा गया है कि आग की प्रकृति के अनुसार सही यंत्र चुनना जरूरी है.
कारखानों और उद्योगों के लिए सुरक्षा मानक:
औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने पर नुकसान बड़ा होता है, इसलिए ज्वलनशील पदार्थों और रसायनों को अलग-अलग स्टोर करें. मशीनों के बीच घर्षण कम करने के लिए नियमित ऑयलिंग और ग्रीसिंग करें. इसके अलावा कारखानों में बाहर निकलने की दूरी का हमेशा ध्यान रखें और निकास द्वारों को खुला रखें.
आग लगने पर क्या करें:
यदि दुर्भाग्यवश आग लग जाए, तो घबराएं नहीं तुरंत 112 नंबर या नजदीकी फायर ब्रिगेड को सूचित करें. इसके अलावा लिफ्ट का प्रयोग कभी न करें, हमेशा सीढ़ियों से उतरें. यदि धुएं में फंसे हों, तो नाक और मुंह को गीले कपड़े से ढककर जमीन के करीब झुककर बाहर निकलें, क्योंकि नीचे हवा साफ होती है, अगर कपड़ों में आग लग जाए, तो भागें नहीं, जमीन पर लेटकर लुढ़कें.
आम लोगों से डीजी एमएस भाटिया की विशेष अपील:
झारखण्ड अग्निशमन सेवा के डीजी एमएस भाटिया ने अपील की है कि आग बुझाने वाले वाहनों को रास्ता देने में देरी न करें. याद रखें उपचार से बेहतर निदान है.
