बिहार न्यूज़: औरंगाबाद के सांवा बिगहा में जल संकट गहराया, एक किलोमीटर दूर से ला रहे गंदा पानी

बिहार: औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की महुआवा पंचायत स्थित सांवा बिगहा महादलित बस्ती में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट विकराल...

बिहार: औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड की महुआवा पंचायत स्थित सांवा बिगहा महादलित बस्ती में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट विकराल रूप ले चुका है. करीब 400 की आबादी वाले इस गांव में हालात इतने खराब हैं कि लोगों को अपनी प्यास बुझाने और दैनिक जरूरतें पूरी करने के लिए गांव से लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है. पानी की कमी ऐसी है कि ग्रामीणों को तय करना पड़ता है कि वे पानी पीएं या स्नान करें. कई लोगों ने दो से चार दिनों तक स्नान नहीं किया है.

नल-जल योजना बनी शोभा की वस्तु

गांव में नल-जल योजना के तहत सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन अनियमित आपूर्ति के कारण यह योजना पूरी तरह फेल साबित हो रही है. जलमीनार सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गई है. गर्मी शुरू होते ही अधिकांश चापाकल सूख गए, जिससे पेयजल का संकट और गहरा गया है. अब ग्रामीणों के पास कुएं के गंदे पानी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.

गंदे पानी से बीमारियों का खतरा

कुएं का पानी पीने योग्य नहीं है, फिर भी मजबूरी में लोग उसी का इस्तेमाल कर रहे हैं. ग्रामीणों को आशंका है कि इससे संक्रामक बीमारियां फैल सकती हैं. शादी-विवाह के इस मौसम में पानी की कमी ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है.

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महिलाओं और बच्चों पर बढ़ा बोझ

पानी लाने की जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों पर अधिक पड़ रही है. दिनभर कुएं से पानी ढोने में उनका समय और ऊर्जा खर्च हो रही है, जिससे वे अन्य काम, यहां तक कि मजदूरी भी नहीं कर पा रहे हैं. भीषण गर्मी में यह संघर्ष और कठिन हो गया है.

प्रशासन से लगाई गुहार

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और पीएचईडी विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. गांव में एक हैंडपंप है, जो बहुत कम पानी दे रहा है. ग्रामीणों को डर है कि अगर कुआं भी सूख गया, तो हालात और भयावह हो जाएंगे.

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हर साल दोहराई जाती है समस्या

पहाड़ी इलाके में बसे इस गांव में हर साल गर्मी के मौसम में जल संकट गहराता है. सरकार के प्रयासों के बावजूद नल-जल योजना जमीनी स्तर पर कारगर नहीं हो पा रही है. कई गांवों में यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित है, जबकि हकीकत में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी?

प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. अवतुल्य कुमार आर्य ने बताया कि नल-जल योजना के खराब होने की जानकारी मिली है. संबंधित विभाग को इसे जल्द ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं और शीघ्र ही गांव में पेयजल आपूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया गया है.

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