Bokaro: अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे के तहत बोकारो में प्रस्तावित एकीकृत विनिर्माण समूह की स्थापना का कार्य अभी भी आरंभ नहीं हो सका. यह मामला जमीन के मूल्यांकन विवाद को लेकर विगत चार वर्षों से अटका हुआ है. कई बार प्रयास के बाद भी अभी तक करीब 740 एकड़ भूमि के हस्तांतरण को लेकर स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) और झारखंड सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी.
रोजगार और निवेश की बड़ी उम्मीद
इस परियोजना में खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, सौर उपकरण, रक्षा उत्पादन, मोटर वाहन, वाहन कलपुर्जे, धातु उद्योग और माल परिवहन से जुड़े उद्योग स्थापित होने हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलने और राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ने की संभावना है. हजारों करोड़ रुपये के निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की उम्मीदों के बावजूद यह परियोजना बैठकों और फाइलों से आगे नहीं बढ़ पाई है.

जमीन की कीमत पर विवाद
कुल मिलाकर जमीन की कीमत को लेकर राज्य सरकार और सेल प्रबंधन के बीच मतभेद के कारण परियोजना खटाई में पड़ी हुई है. जब तक केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सेल के बीच सहमति नहीं बनेगी, इसका रास्ता साफ होना मुश्किल है. प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति इस परियोजना की नियमित समीक्षा कर रही है. बावजूद इसके विवाद का समाधान नहीं हो पाया है. वहीं, राज्य मुख्यालय में इस मामले को मुख्य सचिव स्तर पर देखा जा रहा है. इस मुद्दे को लेकर सेल के प्रति नाराजगी भी बनी हुई है. परियोजना की समीक्षा को लेकर इस माह फिर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग होने वाली है. जिसमें विवाद नहीं सुलझने की स्थिति में सेल के कुछ और अधिकारियों पर गाज गिरने की संभावना है.
पहले हजारीबाग के लिए प्रस्तावित थी परियोजना
इस परियोजना के आरंभिक दौर में एकीकृत विनिर्माण समूह की स्थापना हजारीबाग में प्रस्तावित थी, लेकिन राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम द्वारा वहां की भूमि को आर्थिक दृष्टि से अनुपयुक्त माना गया. साथ ही सरकारी स्वामित्व वाली बड़ी भूमि उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया.
बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा अपनी अतिरिक्त 10,992.985 एकड़ भूमि की जानकारी दी गई, जिसमें से 740 एकड़ भूमि इस परियोजना के लिए चिन्हित की गई. 8 दिसंबर 2022 को हुई बैठक में इसकी पुष्टि भी हो गई, लेकिन इसके बाद भूमि के मूल्य निर्धारण को लेकर विवाद शुरू हो गया.
पुनर्मूल्यांकन के बाद भी नहीं बनी बात
31 मई 2023 को सेल ने 740 एकड़ भूमि के लिए करीब 1450 करोड़ रुपये मूल्य निर्धारित किया. पुनर्मूल्यांकन में इसे घटाकर लगभग 1391.24 करोड़ रुपये कर दिया गया. वहीं, राज्य सरकार का कहना है कि भूमि का मूल्य सर्किल दर और उसकी वास्तविक प्रकृति के आधार पर तय किया जाना चाहिए. जिला प्रशासन के अनुसार कृषि, औद्योगिक और व्यावसायिक श्रेणी की भूमि का मूल्य सेल के दावे से काफी कम है. दूसरी ओर, सेल बाजार मूल्य के आधार पर भुगतान पर अड़ा है.
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बिहार और बंगाल आगे निकले
जिस परियोजना को लेकर झारखंड में अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, जबकि बिहार के डोभी में करीब 1600 एकड़ भूमि पर काम शुरू हो गया है. पश्चिम बंगाल के रघुनाथपुर में भी औद्योगिक गलियारे का काम प्रगति पर है. लेकिन यहां विवाद केवल कीमत का नहीं, बल्कि मूल्यांकन की प्रक्रिया का भी है. जिला प्रशासन की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि चिन्हित भूमि के केवल एक हिस्से का बाजार मूल्य तय किया गया, जबकि शेष भूमि में सड़क, आधारभूत संरचना, गैर-रैयती और वन क्षेत्र भी शामिल हैं. राज्य सरकार का कहना है कि जिन भूखंडों पर सेल का पूर्ण स्वामित्व नहीं है, साथ ही जो जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्धारित है, उसका मूल्य भी कुल लागत में जोड़ दिया गया है. वहीं, सेल द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन निर्धारित करने का दावा किया जा रहा है.
2022 से अब तक का घटनाक्रम
- 08 दिसंबर 2022 : बोकारो की 740 एकड़ भूमि परियोजना के लिए चिन्हित की गई.
- 31 मई 2023 : सेल ने भूमि का मूल्य लगभग 1450 करोड़ रुपये निर्धारित किया.
- 14 जून 2023 : राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम ने मूल्य पर पुनर्विचार का सुझाव दिया.
- 20 जुलाई 2023 : उद्योग निदेशालय ने उपायुक्त से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा.
- 16 अगस्त 2023 : सेल ने भूमि की प्रकृति और मूल्यांकन का विवरण सौंपा.
- 11 अक्टूबर 2023 : उपायुक्त ने विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा.
- 19 फरवरी 2024 : मूल्यांकन के अंतर पर दोबारा प्रतिवेदन तलब किया गया.
- 30 मार्च 2024 : उपायुक्त ने मूल्यांकन प्रक्रिया संबंधी प्रतिवेदन सौंपा.
- 09 जुलाई 2024 : झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण को भूमि हस्तांतरण और विकास की जिम्मेदारी मिली.
- 02 जुलाई 2025 : उच्चस्तरीय समिति ने दोनों पक्षों से मूल्यांकन का आधार मांगा.
- 04 दिसंबर 2025 : सेल ने पुनर्मूल्यांकन कर भूमि का मूल्य लगभग 1391.24 करोड़ रुपये बताया.
- 02 मार्च 2026 : भारत सरकार की समीक्षा बैठक में विवाद शीघ्र सुलझाने के निर्देश दिए गए.
सेल Vs राज्य सरकार
सेल ने पहली बार लगभग 1450 करोड़ रुपये तथा पुनर्मूल्यांकन में लगभग 1391.24 करोड़ रुपये मूल्य निर्धारित किया. बाजार मूल्य के आधार पर लगभग 2.50 लाख रुपये प्रति डिसमिल रखा. वहीं, राज्य सरकार का अनुमानित मूल्यांकन कृषि भूमि 238.02 करोड़ रुपये, औद्योगिक भूमि 357.04 करोड़ रुपये तथा व्यावसायिक भूमि 714.04 करोड़ रुपये है.
जिला प्रशासन का आंकड़ा
जिला प्रशासन के अनुसार सर्किल दर के आधार पर कृषि भूमि 6805 रुपये प्रति डिसमिल, औद्योगिक भूमि 10208 रुपये प्रति डिसमिल तथा व्यावसायिक भूमि 20415 रुपये प्रति डिसमिल है. वहीं, 740 एकड़ भूमि के वर्गीकरण के अनुसार 581.142 एकड़ कानूनी रूप से सेल के नियंत्रण वाली भूमि है. जबकि 88.058 एकड़ जीएम लैंड तथा 77.230 एकड़ वन भूमि है.


