Ranchi: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नारी शक्ति वंदन बिल को लेकर केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा है. प्रदेश कांग्रेस के मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने विधेयक को लेकर बरती जा रही गोपनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जबकि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सरेआम अनदेखी की जा रही है.
16 अप्रैल से सत्र, पर विपक्ष के पास मसौदा नहीं
मुंजनी ने हैरानी जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस महत्वपूर्ण बिल को पारित कराने की तैयारी है. लेकिन विडंबना यह है कि 14 अप्रैल तक भी विपक्षी दलों को इस विधेयक का मसौदा उपलब्ध नहीं कराया गया है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया.
यह भी पढ़ें : बिहार के नए सीएम होंगे सम्राट चौधरी, नीतीश ने भंग की कैबिनेट, राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा
सरकार की मंशा पर उठाए गंभीर सवाल
बिना पूर्व सूचना और मसौदा साझा किए बिल लाना यह दर्शाता है कि सरकार सदन में सार्थक बहस और विपक्ष के सुझावों से बचना चाहती है. मुंजनी ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा महिलाओं का वास्तविक उत्थान नहीं, बल्कि केवल इवेंट बनाकर चुनावी लाभ उठाना है. महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक विषय पर सभी दलों की सहमति आवश्यक है, लेकिन सरकार की ‘जल्दबाजी और गोपनीयता’ उसकी नीयत पर शक पैदा करती है. अगर सरकार वास्तव में महिलाओं का हित चाहती है, तो उसे तुरंत बिल का विस्तृत मसौदा साझा करना चाहिए. कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बिना तैयारी और चर्चा के कानून थोपना लोकतंत्र की भावना के साथ खिलवाड़ है.

यह भी पढ़ें : रांची : राज्यपाल से मिलीं रांची विवि की कुलपति, भेंट की पुस्तक
सार्थक कानून की मांग
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि इतने दूरगामी प्रभाव वाले कानून के लिए व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है. उन्होंने मांग की कि सरकार पारदर्शिता दिखाए ताकि सदन में एक ठोस और प्रभावी कानून बनाया जा सके, जिससे देश की महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार मिल सके.
