Bermo: दामोदर नदी के अस्तित्व और उसके संवेदनशील इकोसिस्टम के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर सरकारी महकमा पूरी तरह से सख्त हो गया है. तेनुघाट बांध प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता की ओर से चंद्रपुरा ताप विद्युत केंद्र के एचओपी को एक आधिकारिक नोटिस पत्रांक-708 के तहत जारी किया गया है. इस पत्र के माध्यम से दामोदर नदी के बेड में उच्च बाढ़ सीमा (एचएफएल) के भीतर बिना अनुमति किए जा रहे गैबियन वॉल के निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया गया है. ऐसा न करने की स्थिति में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) एक्ट के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई भुगतने की दो टूक चेतावनी दी गई है.
मामला दामोदर बचाओ आंदोलन द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों से जुड़ा
दरअसल, यह पूरा मामला जल संसाधन विभाग, हजारीबाग के मुख्य अभियंता और दामोदर बचाओ आंदोलन द्वारा पूर्व में की गई शिकायतों से जुड़ा हुआ है. इन शिकायतों के बाद जब विभाग द्वारा स्थल की सघन जांच कराई गई, तो चैंकाने वाले तथ्य सामने आए. जांच रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रपुरा ताप विद्युत केंद्र द्वारा दामोदर नदी के किनारे से महज 50 मीटर की दूरी के भीतर और उच्च बाढ़ सीमा (एचएफएल) के अंदर लगभग 600 मीटर लंबी गैबियन वॉल का अवैध निर्माण कराया जा रहा है. इतना ही नहीं, निर्माण की आड़ में नदी के तल से धड़ल्ले से बालू का उठाव किया जा रहा है और जगह-जगह गहरे गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी के प्राकृतिक स्वरूप और उसके पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है.

कार्यपालक अभियंता ने डीवीसी के एचओपी से मांगा स्पष्टीकरण
प्रशासनिक स्तर पर इस मनमानी को बेहद गंभीरता से लिया गया है. कार्यपालक अभियंता ने डीवीसी के एचओपी से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किन परिस्थितियों में और किस नियम के तहत इस संवेदनशील क्षेत्र में यह निर्माण कार्य शुरू किया गया. चंद्रपुरा प्रबंधन से पूछा गया है, कि क्या इस निर्माण कार्य के लिए किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा भूमि हस्तांतरण पत्र प्राप्त किया गया है? विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि कोई वैध कागजात हैं, तो उन्हें अविलंब अधोहस्ताक्षरी कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए अन्यथा काम को तुरंत रोक दिया जाए.
इस संवेदनशील मामले में विभागीय कड़े रुख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी प्रतिलिपि तेनुघाट बांध अवर प्रमंडल संख्या के अवर प्रमंडल पदाधिकारी और कनीय अभियंता को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है. फिलहाल इस कार्रवाई से नदी के पर्यावरण से खिलवाड़ करने वाले तत्वों में हड़कंप मचा हुआ है.
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