कोर्ट से डिग्री मिलने के बाद भी जमीन पर कब्जे की कोशिश, झंडा गाड़कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप, पीड़ितों ने लगाई न्याय की गुहार

Ranchi: जिले के ठाकुरगांव थाना क्षेत्र के खखरा गांव में एक ज़मीन विवाद को लेकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने और न्यायालय के आदेश...

कोर्ट से डिग्री मिलने के बाद भी जमीन पर कब्जे की कोशिश

Ranchi: जिले के ठाकुरगांव थाना क्षेत्र के खखरा गांव में एक ज़मीन विवाद को लेकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने और न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने का गंभीर मामला सामने आया है. पीड़ित पक्ष ने अपनी जान-माल की सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है. पीड़ितों का आरोप है कि सिविल कोर्ट से मुकदमा जीतने के बावजूद विपक्षी दल के लोग जबरन उनकी डिक्री ज़मीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं और विरोध करने पर महिलाओं के सहारे झूठे आरोप लगाकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता मनीरुद्दीन अंसारी (पिता: स्व. सलामत अंसारी) और जहाँगीर अंसारी (पिता: स्व. करीमुद्दीन अंसारी), जो ठाकुरगांव थाना क्षेत्र के खखरा गांव के स्थायी निवासी हैं, उन्होंने बताया कि मौजा-खखरा (थाना नं. 98, खाता नं. 80, प्लॉट नं. 292, कुल रकबा 10 डिसमिल) उनकी खरीदी हुई निजी संपत्ति है. इस भूमि को उन्होंने वर्ष 2011 में त्रिलोकी सिंह (पिता: रामचन्द्र सिंह) से ख़रीदा था। ख़रीदने के बाद ज़मीन का विधिवत दाखिल खारिज कराया गया और वे हर साल इसका सरकार को लगान भी चुका रहे हैं.

10 साल कोर्ट में चला मुकदमा, हारे तो शुरू की दबंगई

पीड़ितों के अनुसार, गांव के ही सोहराई पाहन और उनके भाइयों ने मिलकर वर्ष 2014 में सिविल कोर्ट राँची में इस ज़मीन को लेकर एक टाइटल सूट (केस नंबर 17/2014) दायर किया था. करीब 10 साल तक चले इस लंबे अदालती मामले के बाद, जुलाई 2024 में अदालत ने फैसला सुनाया, जिसमें सोहराई पाहन केस हार गया. अदालत से केस हारने के बाद भी विपक्षी दल अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है. वे लगातार ज़मीन पर आकर गाली-गलौज और लड़ाई-झगड़ा कर रहे हैं. पीड़ितों का कहना है कि आरोपी आदिवासी कार्ड खेलते हुए धमकी देते हैं कि यह जमीन हमारे घर के बगल में है, इसे छोड़ दो. हम आदिवासी हैं, जहां जाना है जाओ, हम ज़मीन नहीं छोड़ेंगे.

बाहरी गुंडों को बुलाकर सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की साजिश

आवेदन में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, बीते 9 जनवरी 2026 को रात करीब 8:30 बजे सोहराई पाहन और उसके सहयोगियों ने बाहर से 10-15 गुंडे बुलाए. ये सभी लोग लाठी-डंडे और हरवे-हथियार से लैस होकर आए और पीड़ित की ज़मीन पर जबरन बांस तथा धार्मिक ‘सरना झंडा’ गाड़ दिया. पीड़ितों का आरोप है कि ऐसा करके विपक्षी दल क्षेत्र में सांप्रदायिक दंगा भड़काने और माहौल को तनावपूर्ण बनाने की कोशिश कर रहे हैं. घटना के अगले ही दिन यानी 10 जनवरी 2026 को पुलिस को लिखित सूचना दी गई, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की.

पुलिस को घूसखोर बताकर महिला करने लगती हैं हंगामा

पीड़ितों का कहना है कि जब डीएसपी के निर्देश के बाद वे अपनी ज़मीन पर काम करने जाते हैं, तो विपक्षी दल की महिला पुलिस के सामने आ जाती है. वे पुलिस को ‘घूस खाकर आने’ का आरोप लगाते हुए भद्दी-भद्दी गलियां देने लगती हैं. महिलाओं के इस उग्र रूप को देखकर पुलिस मूकदर्शक बन जाती है या वहां से पीछे हट जाती है. पुलिस की इस लाचारी से आरोपियों का मनोबल और बढ़ गया है. इतना ही नहीं, बीते 14 जुलाई को जब पीड़ित अपनी ज़मीन पर लेबर लेकर काम कराने गए थे, तो सरिता देवी ने उन्हें बदनाम करने की नीयत से नाली विवाद और धार्मिक झंडा उखाड़ने का झूठा आरोप लगाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जो कि पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत है.

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