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सिस्टम की बेरुखी, पलामू में टूटे आशियाने और लाचारी के बीच छह बच्चों के साथ जीने को मजबूर दिव्यांग दंपत्ति, बेटी ने डीसी से लगाई गुहार

Palamu : प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई कितनी गहरी है, इसका मार्मिक उदाहरण पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड...

Palamu : प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई कितनी गहरी है, इसका मार्मिक उदाहरण पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड के अवसाने गांव स्थित बरवाटोली में देखने को मिल रहा है. यहां रहने वाले दिव्यांग दंपत्ति चिंटू चौधरी और उनकी पत्नी प्रीति देवी पिछले लगभग 10 वर्षों से अपने छह बच्चों के साथ एक जर्जर और कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं. जिला मुख्यालय डाल्टनगंज से महज 32 किलोमीटर दूर बसे इस परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है. बरसात, गर्मी और कड़ाके की ठंड जैसे मौसम की मार झेलते हुए पूरा परिवार एक असुरक्षित झोपड़ीनुमा घर में जीवन यापन कर रहा है. शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के कारण चिंटू चौधरी के लिए रोजगार करना और परिवार का भरण-पोषण करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. उनकी ट्राइसाइकिल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं.

रोजगार और आवास की मांग

पीड़ित दंपत्ति का कहना है कि वे दोनों दिव्यांग हैं और उनके पास आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं है. आर्थिक तंगी के कारण वे अपने छह बच्चों की शिक्षा और बेहतर परवरिश नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने प्रशासन से आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार का साधन मुहैया कराने की मांग की है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने बच्चों का भविष्य संवार सकें. सबसे चिंताजनक बात यह है कि दिव्यांग होने के कारण यह परिवार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने में भी सक्षम नहीं है. इसके बावजूद वर्षों से किसी अधिकारी ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया और न ही उनके घर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया.

बच्ची की अपील ने जगाई उम्मीद

परिवार की परेशानियों के बीच उनकी एक छोटी बच्ची ने साहस दिखाते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से पलामू उपायुक्त से मदद की भावुक अपील की है. बच्ची ने अपने परिवार के लिए सुरक्षित आवास और सरकारी सहायता की मांग की है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों की संवेदनाएं इस परिवार के साथ जुड़ रही हैं. मामले को लेकर स्थानीय मुखिया जितेंद्र यादव ने कहा कि उन्होंने जिला मुख्यालय में आवेदन भेजा था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया. हालांकि, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाते तो इस दिव्यांग परिवार को पहले ही किसी सरकारी आवास योजना का लाभ मिल सकता था. जानकारों का कहना है कि वर्तमान में संचालित अबुआ आवास योजना के अलावा पूर्व में भी कई आवास योजनाएं चल चुकी हैं, जिनके तहत इस परिवार को प्राथमिकता दी जा सकती थी. लेकिन स्थानीय स्तर पर पहल और निगरानी की कमी के कारण यह परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित रह गया.

मानसून से बढ़ी चिंता

मानसून की शुरुआत के साथ ही परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. जर्जर मकान कभी भी ढह सकता है, जिससे परिवार की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है. ऐसे में अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं. सोशल मीडिया पर बच्ची की मार्मिक अपील सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. अब देखना यह होगा कि पलामू जिला प्रशासन इस दिव्यांग परिवार को आवास, आर्थिक सहायता और रोजगार उपलब्ध कराकर राहत पहुंचाता है या फिर यह परिवार आगे भी सरकारी मदद का इंतजार करता रहेगा.

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