Ranchi: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की झारखंड प्रदेश शाखा में पिछले पांच वर्षों से चुनाव नहीं होने को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. वर्ष 2021 के बाद से संगठन का चुनाव लंबित है, जिससे राज्यभर के डॉक्टरों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है. अब चुनाव कराने की मांग के साथ-साथ संगठन के वित्तीय लेनदेन की विशेष ऑडिट (स्पेशल ऑडिट) कराने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है. डॉक्टरों के एक वर्ग का आरोप है, कि लंबे समय से चुनाव टाले जाने के पीछे वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश हो सकती है.
एक ही जिले की दो-दो अलग-अलग मतदाता सूचियां भेजी गई थीं राज्य मुख्यालय
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में होने वाले चुनाव के दौरान कई जिला शाखाओं से एक ही जिले की दो-दो अलग-अलग मतदाता सूचियां राज्य मुख्यालय को भेजी गई थीं. मतदाता सूची में इस गड़बड़ी के कारण पूरा चुनाव विवादों में घिर गया और मामला IMA के राष्ट्रीय मुख्यालय तक पहुंच गया. इसके बाद राष्ट्रीय मुख्यालय के निर्देश पर नई और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद मतदाता सूची का सत्यापन और स्क्रूटनी आज तक पूरी नहीं हो सकी है. इसी वजह से राज्य शाखा का चुनाव लगातार टलता रहा है.

संशोधित मतदाता सूची समय पर नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी प्रक्रिया
वर्ष 2025 में IMA झारखंड ने सभी जिला शाखाओं को निर्देश दिया था, कि पहले अपने-अपने जिले में चुनाव कराकर नई कार्यकारिणी का गठन करें और अपडेटेड काउंसिल मेंबरों की सूची राज्य मुख्यालय को भेजें. इसके बाद राज्य इकाई का चुनाव कराने की योजना बनाई गई थी. हालांकि, अधिकांश जिलों से संशोधित मतदाता सूची समय पर नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. इसके बाद जनवरी 2026 में आयोजित राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भी यह स्वीकार किया गया, कि जिला शाखाओं से संशोधित मतदाता सूची नहीं मिलने के कारण राज्य स्तरीय चुनाव लंबित है. बैठक में नई चुनाव तिथि की भी घोषणा नहीं हो सकी, जिससे डॉक्टरों के बीच नाराजगी और बढ़ गई.
डॉक्टरों ने उठाया वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा
अब संगठन के भीतर चुनाव की मांग कर रहे डॉक्टरों ने वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भी उठा दिया है. उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों से एक ही कमेटी पद पर बनी हुई है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. डॉक्टरों के इस समूह का आरोप है कि यदि इतने लंबे समय तक चुनाव नहीं हुए हैं, तो इस दौरान संगठन के फंड, आय-व्यय और खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए. इसी कारण चुनाव से पहले विशेष ऑडिट कराने की मांग तेज हो गई है.
चुनाव और ऑडिट की मांग को लेकर संगठन के भीतर सियासी माहौल गर्म
डॉक्टरों का कहना है कि यदि संगठन के वित्तीय रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी हैं, तो ऑडिट कराने में किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. उनका मानना है कि ऑडिट और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार होने के बाद जल्द से जल्द निष्पक्ष चुनाव कराया जाए, ताकि IMA झारखंड में लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोबारा बहाल हो सके. फिलहाल चुनाव और ऑडिट की मांग को लेकर संगठन के भीतर सियासी माहौल गर्म है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना जताई जा रही है.
यह भी पढ़ें: चाईबासा: ‘गोली मार देंगे’… Facebook Messenger पर धमकी मिलने का आरोप, थाना पहुंचा मामला


