सरायकेला में बिजली विभाग का ‘केबल घोटाला’ ? 15 लाख का केबल बना मौत का जाल

Saraikela: सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा बिछाई गई सप्लाई केबल अब सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की जान के लिए...

Saraikela: सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र में बिजली विभाग द्वारा बिछाई गई सप्लाई केबल अब सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की जान के लिए खतरा बन गई है. शहर के कई इलाकों में लगातार केबल में आग लगने, तेज धमाके के साथ ब्लास्ट होने और तार जलकर सड़क पर गिरने की घटनाएं सामने आ रही है. हालात ऐसे हैं कि लोग अब बिजली आने से ज्यादा केबल फटने से डरने लगे है.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरायकेला नगर पंचायत क्षेत्र में नया केबल लगाने के लिए करीब 15 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों ने कमीशनखोरी के खेल में गुणवत्ता को ताक पर रख दिया. नतीजा यह हुआ कि जनता को मजबूत और सुरक्षित केबल की जगह घटिया सामग्री थमा दी गई, जो अब कुछ ही महीनों में जलने लगी है.

“केबल में करंट कम, भ्रष्टाचार ज्यादा” 

स्थानीय निवासी मनोज साहू ने कहा, “15 लाख का काम कागज पर हुआ, जमीन पर सिर्फ भ्रष्टाचार उतरा. केबल में करंट कम, भ्रष्टाचार ज्यादा है. हर दूसरे दिन कहीं न कहीं तार जल रहा है. भगवान न करे किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाए.

कहां-कहां हो रही घटनाएं 

पिछले 15 दिनों में कोर्ट मोड़, गैरेज चौक, थाना रोड और शहरी क्षेत्र के कई वार्डों में केबल जलने और ब्लास्ट की 7 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं. शनिवार रात थाना रोड में मेन केबल में ब्लास्ट से 3 घंटे तक बिजली गुल रही. रविवार सुबह गैरेज चौक पर जलता हुआ तार सड़क पर गिर गया. गनीमत रही कि कोई चपेट में नहीं आया.

बड़ा हादसा कभी भी संभव 

लोगों का कहना है कि केबल जमीन से महज 8-10 फीट की ऊंचाई पर लटके हैं. आग लगने पर जलते हुए तार सीधे सड़क पर गिरते हैं. बाजार क्षेत्र में दिनभर भीड़ रहती है. अगर भीड़भाड़ के समय तार गिरा तो जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है.

विभाग पर उठ रहे सवाल 

1. 15 लाख में किस गुणवत्ता का केबल लगाया गया, उसकी जांच कौन करेगा?
2. काम पूरा होने के बाद थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन हुआ या नहीं?
3. बार-बार केबल जलने के बावजूद ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं?

विभाग ने कहा – जांच कराएंगे 

इस संबंध में विद्युत कार्यपालक अभियंता से संपर्क किया गया. उन्होंने कहा, “मामला संज्ञान में है. टीम भेजकर जांच कराई जाएगी. अगर गुणवत्ता में कमी पाई गई तो ठेकेदार और संबंधित जूनियर इंजीनियर पर कार्रवाई होगी. उपभोक्ताओं की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है.

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उपायुक्त से पूरे मामले की विजिलेंस जांच और 15 लाख के टेंडर की ऑडिट की मांग की है. चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन में केबल नहीं बदला गया तो विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा.

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