Ranchi: झारखंड कांग्रेस ने अपनी मीडिया और जनसंपर्क क्षमता को धार देने के लिए एक बड़ी और अनूठी संगठनात्मक सर्जरी की है. पार्टी ने प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्टों और मीडिया रिसर्च टीम के कंधों पर जिम्मेदारी तो सौंपी है, लेकिन इसके साथ ही उनके सामने प्रदर्शन की एक बड़ी चुनौती भी रख दी है.
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) द्वारा अधिसूचित इन सभी चेहरों को प्रारंभिक रूप से छह महीने की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) की कठिन कसौटी पर उतारा गया है. यानी अब सिर्फ पद मिल जाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि अपनी काबिलियत को साबित करना भी अनिवार्य होगा.
हर महीने होगा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
इस छह महीने की अग्निपरीक्षा के दौरान इन तराशे गए चेहरों के लिए हर महीने आयोजित होने वाले पूरे दिन के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य किया गया है. कांग्रेस अब अपनी मीडिया टीम को बेहद पेशेवर अंदाज में आगे बढ़ा रही है. यही वजह है कि इनके कार्य प्रदर्शन और हर एक गतिविधि की मॉनिटरिंग सीधे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का कम्युनिकेशन विभाग करेगा.
प्रदर्शन के आधार पर होगी अंतिम नियुक्ति
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इस रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि जो भी प्रतिभागी इस छह महीने के प्रोबेशन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे और उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उनका अंतिम मूल्यांकन एआईसीसी का कम्युनिकेशन विभाग करेगा. इसके बाद ही सबसे योग्य और प्रभावी चेहरों को राष्ट्रीय या राज्य स्तर पर स्थायी नियुक्ति के लिए माननीय कांग्रेस अध्यक्ष के समक्ष अनुशंसित किया जाएगा.
40 उम्मीदवारों की सूची पीसीसी को भेजी गई
इसी सिलसिले में एआईसीसी के कम्युनिकेशन विभाग ने टैलेंट हंट प्रक्रिया के जरिए छनकर सामने आए 40 शीर्ष उम्मीदवारों की एक सूची पीसीसी को भेजी है. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से 15 चेहरे पहले से ही पीसीसी की सूची में जगह बना चुके हैं, जबकि शेष 15 नए चेहरों की पृष्ठभूमि का बारीकी से सत्यापन (बैकग्राउंड वेरिफिकेशन) शुरू कर दिया गया है.
क्लीयरेंस मिलते ही इन्हें भी छह महीने के प्रोबेशन पर डाल दिया जाएगा. कांग्रेस का सीधा लक्ष्य साफ है– लफ्फाजी से दूर, जमीन पर योग्य, प्रशिक्षित और धारदार वक्ताओं की एक ऐसी फौज खड़ी करना जो विपक्ष के हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दे सके.


